क्या बंगाल में बीजेपी ने 2026 चुनावों के लिए अभी से तैयारी शुरु कर दी है.हाल ही में हुई तमाम बड़ी घटनाओं को लेकर अंदाजा ऐसा ही लगाया जा रहा है.आपको बता दे पश्चिम बंगाल में मार्च और अप्रैल के माह में विधानसभा चुनाव होने है.ऐसे में चुनावी तैयारियां अभी से ही देखने को मिल रही है .जहां आरएसएस लगातार ग्राउंड पर सक्रिय रहकर संगठन को मजबूत कर रही है वही बीजेपी भी बड़ी धार्मिक रैलियां निकालकर लोगों तक पकड़ मजबूत कर रही है.भाजपा 2021 में पहली बार बंगाल में विपक्षी पार्टी बनी थी। वह 2026 में TMC को कांटे की टक्कर देने की कवायद में है। हालांकि, भाजपा के लिए यह सब अकेले करना आसान नहीं होगा। ऐसे में हरियाणा और दिल्ली की तरह RSS बंगाल में भी उसकी ढाल बनने की कोशिश कर रहा है। संघ प्रमुख मोहन भागवत फरवरी में 10 दिनों के लिए बंगाल दौरे पर थे। सूत्र बताते हैं कि इस दौरान भागवत ने भाजपा की जीत के लिए ब्लूप्रिंट तैयार किया। एक्सपर्ट कहते हैं कि भाजपा ने अगर TMC के वोट बैंक में 4% की सेंध लगा दी, तो यह 2026 के चुनाव में गेम चेंजर साबित हो सकता है। बंगाल में 70% हिंदू और 30% मुस्लिम आबादी है। मुस्लिम वोटरों की एकजुटता के कारण TMC हर चुनाव में मजबूत खड़ी होती है। हालांकि, हिंदुओं का वोट TMC और भाजपा में बंट जाता है।2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 50% हिंदुओं और 7% मुस्लिमों का वोट मिला था। वहीं, TMC को 39% हिंदुओं और 75% मुस्लिमों ने वोट दिया। ऐसे में भाजपा 2026 चुनाव से पहले हिंदुओं को एकजुट करने की कोशिश कर रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा हिंदू वोट उसे मिलें।इसके लिए भाजपा, संघ और विश्व हिंदू परिषद ने 6 अप्रैल को रामनवमी से 12 अप्रैल को हनुमान जयंती तक पूरे राज्य में धार्मिक शोभायात्राओं और रैलियां निकालने में पूरी ताकत झोंक दी।दूसरी तरफ, सत्ताधारी पार्टी इस उहापोह में रही कि खुद को हिंदू विरोधी न दिखने दिया जाए। एंटी-हिंदू इमेज से बचने के लिए TMC को भी रामनवमी पर रैलियां निकालकर यह बताना पड़ा कि वह हिंदू विरोधी नहीं है।

