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राजस्थानी संगीत जगत को बड़ा झटका, लोकधुनों के सबसे बड़े संरक्षक केसी मालू का निधन

राजस्थानी लोकसंगीत और संस्कृति को नई पहचान दिलाने वाले वीणा म्यूजिक (पूर्व में वीणा कैसेट्स) के संस्थापक केसी मालू का सोमवार देर रात करीब डेढ़ बजे हार्ट अटैक से निधन हो गया। उनके निधन से संगीत, साहित्य और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर है। वे 79 वर्ष के थे।

उनका अंतिम संस्कार मंगलवार शाम 4:30 बजे जयपुर में किया जाएगा। अंतिम यात्रा शांति पथ स्थित मालू हाउस (पार्श्वनाथ कॉलोनी, निर्माण नगर) से पुरानी चुंगी मोक्षधाम के लिए रवाना होगी।

राजस्थान की लोकधरोहर को घर-घर और दुनिया तक पहुंचाने वाले व्यक्तित्व

1946 में चूरू जिले के सुजानगढ़ में जन्मे केसी मालू ने अपना पूरा जीवन राजस्थानी भाषा, लोकसंगीत और लोक कलाकारों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया।

उन्होंने वीणा कैसेट्स के माध्यम से हजारों राजस्थानी लोकगीत, भजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को रिकॉर्ड कर देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक पहुंचाया। उनकी बदौलत अनेक नए लोक कलाकारों को मंच मिला और राजस्थानी संगीत को नई पहचान मिली।

राजस्थानी भाषा के लिए भी लगातार करते रहे संघर्ष

केसी मालू केवल संगीत निर्माता नहीं थे, बल्कि राजस्थानी भाषा के संवर्धन के लिए भी सक्रिय रहे। वे लंबे समय तक राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के अभियान से जुड़े रहे और इस दिशा में लगातार प्रयास करते रहे।

1987 की ऐतिहासिक ‘लता मंगेशकर नाइट’ के सूत्रधार थे मालू

राजस्थान में वर्ष 1987 के भीषण अकाल के दौरान राहत राशि जुटाने के लिए केसी मालू ने एक ऐसा आयोजन किया, जिसे आज भी याद किया जाता है।

26 नवंबर 1987 को जयपुर के एसएमएस स्टेडियम में आयोजित ‘लता मंगेशकर नाइट’ के जरिए करीब 1.01 करोड़ रुपये का फंड एकत्र किया गया था। उस दौर में यह राशि बेहद बड़ी मानी जाती थी।

इस आयोजन की खास बात यह रही कि स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने बिना किसी पारिश्रमिक के कार्यक्रम में प्रस्तुति दी। वे अपनी पूरी टीम के साथ चार दिन जयपुर में रहीं।

राजस्थानी में बात की, राजस्थानी भोजन किया

केसी मालू ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब वे एयरपोर्ट पर लता मंगेशकर का स्वागत करने पहुंचे तो उन्होंने कहा, “धन्यभाग राजस्थान रा ज्यो थे पधारया।”

इस पर लता मंगेशकर ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “अत्ता दिन थे बुलाया ही कोनी।”

जयपुर प्रवास के दौरान उन्होंने राजस्थानी भाषा में बातचीत की, स्थानीय भोजन किया और राजस्थान के प्रति अपना विशेष लगाव भी दिखाया।

20 की जगह गाए थे रिकॉर्ड 26 गीत

कार्यक्रम से पहले लता मंगेशकर ने आंखों पर पट्टी बांधकर रिहर्सल की थी। आमतौर पर वे किसी कार्यक्रम में 20 से अधिक गीत नहीं गाती थीं, लेकिन जयपुर के दर्शकों के उत्साह को देखकर उन्होंने लगातार 26 गीत प्रस्तुत किए।

इन्हीं गीतों में उनका प्रसिद्ध गीत “आएगा आने वाला” भी शामिल था। मंच से उन्होंने राजस्थान के महान संगीतकार खेमचंद्र प्रकाश को भी याद किया, जिन्होंने उन्हें फिल्मी संगीत में पहला बड़ा अवसर दिया था।

कार्यक्रम के बाद राहत राशि का चेक तत्कालीन मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी को सौंपा गया।

लोकसंगीत को दस्तावेजों में भी सहेजा

केसी मालू ने केवल गीत रिकॉर्ड ही नहीं किए, बल्कि राजस्थानी लोकसंगीत को दस्तावेजी रूप भी दिया।

उन्होंने 5,000 से अधिक राजस्थानी लोकगीतों की पांडुलिपि और ध्वनिलिपि तैयार कर उनकी ऑडियो रिकॉर्डिंग करवाई, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए यह अमूल्य धरोहर सुरक्षित हो सकी।

221 विवाह गीतों का विश्वस्तरीय संकलन तैयार किया

राजस्थानी विवाह गीतों पर उनका शोध कार्य भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

उन्होंने 221 राजस्थानी विवाह गीतों का विशाल संकलन तैयार किया, जिसे हिंदी, अंग्रेजी और राजस्थानी तीन भाषाओं में सचित्र प्रकाशित किया गया। इसे विवाह गीतों का विश्व के सबसे बड़े संग्रहों में गिना जाता है।

इसके साथ ही इन गीतों की 24 ऑडियो-वीडियो सीडी भी जारी की गईं, जिससे पारंपरिक लोकसंगीत को डिजिटल रूप में भी संरक्षित किया जा सका।

‘घूमर’, ‘चीरमी’ और ‘कांगसियो’ जैसे गीतों को मिली नई पहचान

केसी मालू ने राजस्थानी लोकसंगीत के कई कालजयी गीतों और एल्बमों का निर्माण किया।

‘घूमर’, ‘चीरमी’ और ‘कांगसियो’ जैसे लोकप्रिय गीतों को उन्होंने व्यापक पहचान दिलाई। उनकी कोशिशों से राजस्थानी लोकधुनें देशभर में सुनी जाने लगीं।

‘सुर-संगम’ और वीणा म्यूजिक के जरिए तैयार की नई पीढ़ी

उन्होंने सुर-संगम संस्थान और वीणा म्यूजिक की स्थापना कर अनेक युवा कलाकारों को मंच दिया। महान संगीतकार नौशाद के साथ मिलकर भी उन्होंने राजस्थानी लोकसंगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम किया।

कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से हुए सम्मानित

कला और संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें समग्र कला साधना अवॉर्ड, डागर घराना अवॉर्ड सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले।

राजस्थान सरकार ने भी लोककला और संस्कृति के संरक्षण में उनके दशकों लंबे योगदान को देखते हुए उन्हें ‘राजस्थान रत्न अवॉर्ड’ से सम्मानित किया था।

देशभर से उमड़ा शोक

केसी मालू के निधन पर ग्रैमी पुरस्कार विजेता विश्वमोहन भट्ट, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ समेत कला, साहित्य और सामाजिक क्षेत्र की कई हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया।

विश्वमोहन भट्ट ने कहा कि लोकसंगीत के इतने बड़े संरक्षक का अचानक चले जाना बेहद पीड़ादायक है और उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कुछ दिन पहले ही उनकी मुलाकात केसी मालू से हुई थी। उन्होंने कहा कि मालू ने अपना पूरा जीवन संगीत और संस्कृति को समर्पित किया तथा राजस्थानी संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।