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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: जिला जजों को 61 साल तक सेवा जारी रखने की अंतरिम राहत, सभी राज्यों और हाईकोर्ट्स से मांगा जवाब

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक सेवा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। ऑल इंडिया जजेज एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के न्यायिक अधिकारियों की सेवा अवधि और रिटायरमेंट उम्र से जुड़े मुद्दे पर केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों, केंद्रशासित प्रदेशों और सभी हाईकोर्ट्स को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम राहत देते हुए आदेश दिया है कि जो न्यायिक अधिकारी इस मामले के दायरे में आते हैं, उन्हें 61 वर्ष की आयु पूरी होने तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी जाएगी। यह राहत तब तक जारी रहेगी, जब तक इस मामले पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता।

चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने की सुनवाई

इस मामले की सुनवाई सोमवार, 13 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने की। इस पीठ में मुख्य न्यायाधीश जोयमाल्या बागची और जस्टिस विनोद चंद्रन मोहना शामिल थे।

पीठ ने कहा कि यह मामला केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर की न्यायिक सेवाओं और हजारों न्यायिक अधिकारियों को प्रभावित करता है। इसलिए इस मामले में सभी संबंधित पक्षों का पक्ष जानना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को इसी विषय से जुड़े एक अन्य लंबित मामले के साथ जोड़ने का भी निर्देश दिया है।

सभी राज्यों, हाईकोर्ट्स और न्यायिक संस्थानों को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों, केंद्रशासित प्रदेशों और देश के सभी हाईकोर्ट्स को नोटिस जारी किया है।

इसके अलावा जिला अदालतों, स्टेट न्यायिक सेवाओं और अधीनस्थ न्यायालयों से जुड़े अधिकारियों को भी इस मामले की जानकारी भेजी गई है, ताकि सभी संबंधित पक्ष अपनी राय और जवाब अदालत के सामने रख सकें।

अभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों की रिटायरमेंट उम्र 60 वर्ष

देश के अधिकांश राज्यों में जिला एवं सत्र न्यायालयों तथा अन्य अधीनस्थ अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की वर्तमान रिटायरमेंट उम्र 60 वर्ष निर्धारित है।

राजस्थान सहित कई राज्यों में भी जिला न्यायपालिका के न्यायाधीश 60 वर्ष की उम्र पूरी होने पर सेवानिवृत्त हो जाते हैं।

ऑल इंडिया जजेज एसोसिएशन की याचिका में न्यायिक अधिकारियों की सेवा अवधि बढ़ाने और रिटायरमेंट उम्र से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार करने की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश क्या है?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि:

  • याचिकाकर्ताओं को 61 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी जाएगी।
  • यह राहत उन्हीं अधिकारियों को मिलेगी जिन्हें पहले ही सेवा से मुक्त नहीं किया गया है।
  • यह व्यवस्था अंतिम फैसला आने तक लागू रहेगी।
  • मामले में सभी राज्यों और संबंधित संस्थानों का पक्ष सुनने के बाद आगे निर्णय लिया जाएगा।

अगली सुनवाई 22 जुलाई 2026 को

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई 2026 तय की है। इस दौरान केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और हाईकोर्ट्स की ओर से दिए जाने वाले जवाबों पर विचार किया जाएगा।

अंतिम फैसला आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र स्थायी रूप से बढ़ाई जाएगी या नहीं।

न्यायिक अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण क्यों है यह फैसला?

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश देश की जिला न्यायपालिका के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि भविष्य में अदालत न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के पक्ष में फैसला देती है, तो इसका असर देशभर की न्यायिक सेवाओं पर पड़ेगा।

इससे अनुभवी न्यायिक अधिकारियों को अधिक समय तक सेवा देने का अवसर मिल सकता है और न्याय व्यवस्था में लंबे अनुभव वाले अधिकारियों की उपलब्धता बनी रह सकती है।

हालांकि, अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई और सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही आएगा।