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आखिर कब तक राजे सहेगी अपमान ,क्या वसुंधरा लेगी अपमान का बदला ?

राजस्थान की राजनीति एक बार फिर से ऊबाल पर है.और इस बार वसुंधरा राजे की वजह से प्रदेश की राजनीति में थोडी गर्मी देखी जा सकती है .वसुंधरा को 2023 में ना केवल दरकिनार किया गया.बल्कि तबसे लेकर अब पार्टी में कोई बडी जिम्मेदारी नहीं दी है .पहले तो उन्होने कुछ नहीं कहा.और अपने अच्छे समय का इंतजार करने लगी.लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि अब वसुंधरा राजे अब खामौश बैठने वाली नहीं है . वसुंधरा राजे के तेवर कुछ दिनों से बदले बदले नजर आ रहे है .पिछले कुछ हफ्तों में वसुंधरा राजे की राजनीतिक सक्रियता में कुछ इजाफा भी देखने को मिला.राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद को लेकर चर्चाओं में उनका नाम भी आया.और राजस्थान की सीएम की कुर्सी पर बदलाव की अटकले भी तेज….लेकिन अंदरखाने से तो खबरे यही है कि मोदी और शाह की जोडी ना तो उन्हे राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी देनी चाहती है और ना ही उन्हे राज्य की सत्ता की चाबी सौंपना चाहती है.ऐसे में अब सवाल उठता है कि क्या अब वसुंधरा राजे के सब्र का बांध टूटने वाला है.आपको बता दे वसुंधरा राजे के पास कुछ विधायकों का ही नही बल्कि कुछ सांसदों का भी समर्थन है .वही दूसरी ओर केंद्र की मोदी सरकार बैसाखियों के सहारे टिकी हुई है और हर एक सांसद की अहमियत भी है .और अगर वसुंधरा राजे चाहे तो ये नाखुशी एक बडे राजनैतिक उठापटक में तब्दील हो सकती है.वही राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार भी वसुंधरा राजे को खाली हाथ लौटाया गया तो वो इस बार खामौश नहीं बैठेगी.यहीं कारण है कि सियासी गलियारों में चर्चाएं चल रही है कि वो कभी भी कांग्रेस में भी जा सकती है.हालांकि अभी तक इस पर ऐसा कोई अंदेशा सामने नही आया है लेकिन राजनैतिक गलियारों की चर्चाओं को आखिर कौन विराम दे सकता है .चर्चाएं है ये तो जारी रहेगी…वही अगर वसुंधरा कांग्रेस में जाती है तो कांग्रेस को ना केवल मजबूती मिलेगी.बल्कि बीजेपी को उसके गढ में ही पछाड देगी.क्योंकि वसुंधरा के पास जमीनी पकड है और संगठन का अनुभव है .वही अगर वसुंधरा बीजेपी से किनारा करती है तो ना केवल राज्य की राजनीति ढगमगाएगी .बल्कि कुछ सांसदों का समर्थन भी वसुंधरा केंद्र से छीन सकती है .वही कुछ समीकरण ऐसे भी इशारा कर रहे है कि अब राजे बीजेपी में और अपमान का घूंट नहीं पीएगी.क्योंकि बार बार दरकिनार किये जाने से उनमे जो गुस्सा फूट रहा है वो किसी ना किसी वजह से बाहर जरुर आएगा और वो गुस्सा ऐसा होगी जो शायद प्रदेश की राजनीति के सारे समीकरण ही बदल दे.