तेलंगाना के निर्मल जिले में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ सिर्फ 13 साल के एक छात्र ने आत्महत्या कर ली। वह नौवीं कक्षा में पढ़ता था और मोबाइल गेम PUBG का इस हद तक आदी हो चुका था कि उसके दिन का ज्यादातर समय उसी में बीतता था। माता-पिता ने जब देखा कि बेटा पढ़ाई छोड़कर सिर्फ गेम में डूबा रहता है, तो उन्होंने उसे डांटा और फोन छीन लिया। परिवार वालों का कहना है कि वो बच्चा अचानक चुप रहने लगा था, और अंदर ही अंदर गुस्सा और तनाव में था। अगले ही दिन उसने घर के एक कमरे में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। जब तक परिवार को पता चला और अस्पताल ले जाया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पुलिस की शुरुआती जांच में कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, लेकिन परिजनों के बयान और घटनाक्रम से साफ है कि बच्चे की मौत PUBG की लत और उस पर लगी पाबंदी के कारण हुई। यह मामला भारत में बच्चों में बढ़ती गेमिंग एडिक्शन की गंभीरता को उजागर करता है। गेम्स बच्चों को न सिर्फ मानसिक रूप से प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि उनके निर्णय लेने की क्षमता, भावनात्मक नियंत्रण और वास्तविक दुनिया से जुड़ाव पर भी बुरा असर डाल रहे हैं।

