दीवाली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली छोटी दिवाली, जिसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है, धार्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। छोटी दिवाली को अंधकार पर प्रकाश की विजय और नकारात्मकता से मुक्ति का प्रतीक माना गया है।
यम देवता की पूजा का महत्व
इस दिन यमराज की पूजा करने की परंपरा होती है। धार्मिक मान्यता है कि नरक चतुर्दशी के दिन यमराज की पूजा करने से मृत्यु का भय कम होता है और अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है।
इसी कारण इस दिन “यम दीपक” जलाने की विशेष परंपरा है, जो दीर्घायु और परिवार की सुरक्षा का प्रतीक है।
यम दीपक जलाने की विधि और दिशा का महत्व
नरक चतुर्दशी की शाम को यम दीपक दक्षिण दिशा में जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा कहा गया है।
दीपक को गेहूं के आटे या मिट्टी से बनाया जाना चाहिए।
इसमें सरसों का तेल डालें और चार बत्तियां लगाएं। ये चार बत्तियां जीवन की चार दिशाओं में प्रकाश फैलाने का प्रतीक हैं।
दीपक जलाने के बाद उसे घर के सभी कोनों में घुमाने की परंपरा है, जिससे हर दिशा में सकारात्मक ऊर्जा फैले।
अंत में दीपक को मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रख दें, ताकि नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश न कर सके।
इस साल छोटी दिवाली कब है?
इस वर्ष नरक चतुर्दशी 19 अक्टूबर 2025 (रविवार) को मनाई जाएगी। इसी दिन लोग यम दीपक जलाकर परिवार की दीर्घायु और समृद्धि की कामना करते हैं।
धार्मिक मान्यता
शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था। इसलिए इसे “नरक चतुर्दशी” कहा गया — जो पाप, अंधकार और मृत्यु भय से मुक्ति का प्रतीक है।
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