जयपुर। राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन लिमिटेड (RMSCL) की मेडिकल उपकरण और सामान खरीद में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। महालेखा नियंत्रक (CAG) की ताज़ा ऑडिट रिपोर्ट में तीन साल (2021–2023) के दौरान जारी कई टेंडरों में नियम विरुद्ध संशोधनों का खुलासा हुआ है। इसी संबंध में CAG ने मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित चार अधिकारियों को पत्र लिखते हुए कार्रवाई की सिफारिश की है।
10 टेंडरों में बार-बार शर्तें बदलीं, पारदर्शिता नियमों का उल्लंघन
ऑडिट में पता चला कि RMSCL ने कम से कम 10 टेंडरों में 2 से 7 बार तक शर्तों में बदलाव किए। यह बदलाव ऐसे समय किए गए, जब प्री-बिड बैठक के बाद RTPP एक्ट के तहत शर्तों में संशोधन को अखबारों में प्रकाशित करना अनिवार्य है—ताकि अन्य कंपनियां भी नई शर्तों पर हिस्सा ले सकें।
लेकिन RMSCL ने संशोधन केवल अपने पोर्टल पर जारी किए, जिससे टेंडर में प्रतिस्पर्धा घटकर एक या दो फर्मों तक सीमित हो गई।
CAG ने बताई प्रमुख अनियमितताएं
पत्र में CAG ने RTPP एक्ट के कई प्रावधानों के उल्लंघन का उल्लेख किया—
सेक्शन 22(1): प्री-बिड में सिर्फ संदेह दूर किए जा सकते हैं, कंपनियों के सुझावों पर शर्तें नहीं बदली जा सकतीं।
सेक्शन 23(1): शर्त बदलने पर नया टेंडर या अखबारों में संशोधन प्रकाशित करना जरूरी, RMSCL ने ऐसा नहीं किया।
रूल 46: प्री-बिड मीटिंग के मिनट्स तैयार कर सभी कंपनियों को भेजना होता है, जिसे सही तरीके से पालन नहीं किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार RMSCL ने शर्तें विशेष कंपनियों के सुझावों के अनुरूप बदलीं, जिससे उन फर्मों को सीधे लाभ मिला और अन्य कंपनियां बाहर हो गईं।
इन टेंडरों में हुई सबसे बड़ी गड़बड़ियां
2023
हाई फ्लो नेज़ल कैनुला (HFNC) – ₹15 करोड़
टेंडर नंबर 775
20 जुलाई 2023 को प्री-बिड बैठक
3 बार शर्तों में बदलाव
2022
ग्लूकोज स्ट्रिप, लेन्सेंट, ग्लूकोमीटर – ₹8.96 करोड़
शर्तें 4 बार बदलीं
संशोधनों के बाद केवल 3 कंपनियां बचीं
2021
बेबी रिसीविंग किट – ₹18 करोड़
शर्तें 7 बार बदलीं
आखिर में केवल 1 फर्म ही क्वालिफाई रही
हीमोग्लोबिन जांच मीटर व स्ट्रिप – ₹44 करोड़
3 बार संशोधन
सिर्फ 2 कंपनियां क्वालिफाई कर पाईं
CAG ने इन सभी मामलों को सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता नियमों का उल्लंघन बताते हुए वित्तीय नुकसान की आशंका भी जताई है। अब मुख्य सचिव के स्तर पर इस रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

