धर्मगुरु कहलाने वाला वह चेहरा, जिस पर श्रद्धालुओं ने भरोसा किया, आज वही अपराधी आसाराम सलाखों के पीछे है। नाबालिग से यौन शोषण मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा हैं जो लंबे समय से बीमारी का हवाला देकर अंधे कानून के आँखों पर एक पट्टी बांध कर जमानत पर जेल से बाहर था। लेकिन अब जाकर कानून जागा और हाईकोर्ट ने उसके तर्कों को खारिज कर दिया। आखिरकार 30 अगस्त को जोधपुर स्थित सेंट्रल जेल में आशाराम ने सरेंडर कर दिया। आस्था के नाम पर पाप की गाथा लिखने वाले आसाराम की यह वापसी न्याय की जीत और समाज के लिए एक गहरी सीख है।30 अगस्त की सुबह, जोधपुर के पाल स्थित आश्रम से पूरी खबर यहां देखें
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