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अशोक गहलोत का तंज: वसुंधरा सीएम बनतीं तो राजनीति का रंग और भी तेज़ होता

वसुंधरा के लिए गहलोत का बड़ा बयान कहा-राजस्थान का सीएम उनको होना चाहिए था उनके पास सत्ता का लंबा अनुभव है बीजेपी की पहली पसंद राजे को होना चाहिए था

अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे दोनों ही नेता राजस्थान के दिग्गज नेता है .दोनों को ही राजस्थान की सत्ता की चाबी मिली और दोनों ने ही राजस्थान की सत्ता को बखूबी से संभाला और सरकारें चलाई.वही दोनों नेताओं के एक दूसरे के प्रति बयान भी चर्चाओं में बने रहते है .राजस्थान के कुछ नेता तो वसुंधरा और गहलोत के बीच गठजोड मानते है .कि दोनों ने ही सरकारे बचाने के लिए एक दूसरे का सहयोग किया…वही अब राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर से वसुंधरा राजे के लिए एक बडा बयान दिया है..जिसके बाद से सियासी गलियारों में चर्चाओं का माहौल गर्म हो गया है.

दरअसल राजस्थाबन के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शनिवार शाम को अजमेर पहुंचे थे. उन्होंने स्वास्तिक नगर पीड़ित लोगों से उनकी पीड़ा जानी, आज मीडिया कर्मियों से रूबरू हुए. गहलोत ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के जोधपुर दौरे को लेकर बड़ा बयान दिया है.गहलोत ने कहा कि जोधपुर को दौरे के लिए चुनना उनकी कृपा है, लेकिन उम्मीद है कि यहां से जाने वाला संदेश देश में मोहब्बत और भाईचारे का होगा. गहलोत ने कहा कि जोधपुर का अपना अलग इतिहास है, और यही शहर हमेशा सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल रहा है, इसलिए यहां से ऐसी बातें निकलनी चाहिए जो लोगों को जोड़ें, न कि तोड़ें.वही राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए भी पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने बडा बयान दिया.उन्होने कहा कि अभी तक राजे को अवसर नहीं मिला है, अगर मौका मिला होता तो मजा आता. उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी की नेचुरल चॉइस वसुंधरा होनी चाहिए थी, लेकिन पार्टी ने उन्हें मौका नहीं दिया. गहलोत ने कहा कि राजे अनुभवी नेता हैं और उन्हें अवसर नहीं मिलना दुखद है.

गहलोत ने राजस्थान सरकार पर जनहितकारी योजनाएं बंद करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि चिरंजीवी योजना में 25 लाख तक मुफ्त इलाज मिलता था, लेकिन आयुष्मान योजना में जनता को राहत नहीं मिल रही. पेंशन बंद होने से लोगों की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है. उन्होंने मुख्यमंत्री को सलाह दी कि अच्छे प्रशासन के लिए अधिकारियों और कार्यकर्ताओं पर नियंत्रण जरूरी है. गहलोत ने कहा कि भजनलाल शर्मा को दो साल का समय मिल चुका है, लेकिन अब उनसे सवाल पूछना बनता है. हर फैसला दिल्ली से करवाना ठीक नहीं, जनता जवाब चाहती है. उन्होंने इस बात को दोहरया कि अगर वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री होतीं, तो प्रदेश में बेहतर काम होता.

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