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गहलोत और पायलट की मुलाकात…बन गए नये सियासी समीकरण !

राजस्थान में कांग्रेस के अंदर खेमेबाजी और गुटबाजी दौर काफी समय से चला आ रहा है.कांग्रेस के भीतर चल रही खेमेबाजी को मिटाने और कांग्रेस को फिर से राजस्थान में मजबूती देने के लिए अब दो बडे नेताओं ने हाथ मिला लिया है.और इन दोनों नेताओं की मुलाकात अब राजस्थान के सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है.अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच जयपुर में हुई यह मुलाक़ात न केवल प्रतीकात्मक है, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।वही इस मुलाकात के कुछ प्रमुख संकेत और संभावित प्रभाव भी देखने को मिल सकते है.माना जा रहा है कि जो कडवाहट की बर्फ काफी समय से दोनों नेताओं के बीच जमी हुई थी वो इस मुलाकात के बाद कही ना कही पिघलेगी जरुर….वही लंबे समय से दोनों नेताओं के बीच चली आ रही तल्ख़ी अब कुछ नरमी की ओर बढ़ती दिख रही है। वही दोनो नेताओं की पिछले तीनों की मुलाकातें दर्शाती है कि दोनों नेता अब संवाद के रास्ते अपने रिश्ते सुधारना चाहते है.इसके साथ ही कार्यकर्ताओं भी इस मुलाकात से सीधा संदेश गया है कि कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जो आंतरिक एकता की उम्मीद में थे। पार्टी के अंदर मनोबल को मज़बूती मिल सकती है, जिससे संगठनात्मक ढाँचा पुनः सक्रिय हो सकता है।इस मुलाक़ात को आने वाले महीनों में कांग्रेस के नेतृत्व या संगठनात्मक ढांचे में बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा सकता है।संभव है कि पार्टी आलाकमान अब दोनों नेताओं की भूमिका को पुनः परिभाषित करने की दिशा में सोचे। वही माना जा रहा है कि पायलट गहलोत को राजेश पायलट की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में आमंत्रण देने पहुंचे थे.लेकिन आमंत्रण के पीछे राजनीतिक समीकरण भी देखने को मिल रहे है.आमंत्रण का आधार भले ही एक श्रद्धांजलि सभा हो, लेकिन इसके ज़रिए सियासी संवाद का मंच तैयार हुआ। और गहलोत की पोस्ट से यह साफ होता है कि उन्होंने अतीत की यादों के माध्यम से सचिन पायलट के साथ भावनात्मक जुड़ाव को भी उजागर करने की कोशिश की।राजस्थान कांग्रेस में यह मुलाक़ात “बर्फ पिघलने” की शुरुआत हो सकती है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाज़ी होगा। इसके पीछे पार्टी आलाकमान की रणनीति, राज्य में संगठनात्मक ज़रूरतें और आगामी चुनावी लक्ष्य भी छिपे हो सकते हैं।यदि ये संवाद जारी रहते हैं और दोनों नेताओं को कोई साझा मंच या भूमिका मिलती है, तो यह राजस्थान कांग्रेस के लिए एक बड़ी सकारात्मक दिशा हो सकती है। आने वाले हफ्तों में यदि और ऐसे संकेत मिलते हैं, तो इसे एक “राजनीतिक संयोजन के रूप में देखा जा सकता है।