प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने राजस्थान विश्वविद्यालय में NSUI के कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीचार्ज और हिरासत की कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे सत्ता का खुला दुरुपयोग बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने वाले छात्रों को दबाना बेहद चिंताजनक है।
डोटासरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि विश्वविद्यालय परिसर में RSS के कथित राजनीतिक प्रभाव के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों पर बल प्रयोग करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब शांतिपूर्ण विरोध भी अपराध माना जाएगा। उनके अनुसार, लोकतंत्र में असहमति को दबाने के बजाय उसे सुना जाना चाहिए, लेकिन वर्तमान सरकार शैक्षणिक संस्थानों को भी राजनीतिक हस्तक्षेप का केंद्र बना रही है।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एनएसयूआई का विरोध लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की गिरफ्तारी सरकार की घबराहट और तानाशाही सोच को दर्शाती है।
गहलोत ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता को कमजोर करने के प्रयासों का विरोध करना जायज़ है और इसे दबाना संविधान की भावना के विपरीत है। उन्होंने सरकार से मांग की कि गिरफ्तार सभी छात्रों को तुरंत रिहा किया जाए।

