राजस्थान के झालावाड़ स्कूल हादसे ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों की इमारतो की पोल खोल दी| झालावाड तो एक उदाहरण था| प्रदेश में कई जिलो,ढाणियों और कस्बों में ऐसी स्कूलें है जो कभी भी बड़े हादसे को न्यौता दे सकती है| झालावाड के में हुए हादसे के एक दिन बाद ही प्रदेश के तीन अन्य इलाकों से भी जर्जर स्कूलों की इमारतों की गिरने की खबरे सामने आई है| जिनमे डेगाना,टोंक और करौली जिले में स्थित इन स्कूलों के हाल अब लोगों के सामने आ गये है| हालांकि जब यहा जर्जर स्कूलों की छत धवस्त हुई उस समय गनीमत रही कि कई भी मासूम वहा मौजूद नहीं था| नही तो प्रदेश में एक बार फिर झालावाड जैसी दुखद घटना देखने को मिलती| लेकिन सवाल तो ये है कि आखिर प्रदेश में स्कूलों के ये हाल क्यों है बेहाल, सरकारी तंत्र की भेंट आखिर क्यों चढ रहे है मासूम| ना तो झालावाड़ का स्कूल अंतिम है और ना ही डेगाना का और ना ही टोंक का और ना ही करौली का| पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान में अच्छी बारिश हो रही है और हमारे सरकारी क्षेत्र में हुए निर्माण कार्यों में बेहिसाब भ्रष्टाचार हुआ है। ऐसे में आप मानकर चलिए कि आपके सामने ऐसी तस्वीरें आती रहेंगी। डेगाना वाली तस्वीर को हम देखेंगे तो लगता नहीं है कि यह कोई बहुत पुराना निर्माण कार्य है और जर्जर होकर छत गिरी है क्योंकि दीवारें, रंग रोगन बहुत ठीक-ठाक सा दिख रहा है। वही बात करें टोंक की तो यहा भी बस इतनी राहत मिली कि कोई बच्चा या शिक्षक उस समय मौजूद नही था| जब बिल्डिंग का हिस्सा ढहने लगा। अगर यहां होते तो हम एक और झालावाड़ ही दोहरा रहे होते। खैर स्कूल ही नहीं प्रत्येक सरकारी क्षेत्र के निर्माण कार्य को अब सरकार को बेहद गंभीरता से लेना होगा। जितनी भी जर्जर इमारतें हैं, उन्हें तुरंत कंडम घोषित करके वहां बच्चों और मरीजों का जाना प्रतिबंधित करना होगा। अन्यथा रोज-रोज ऐसी घटनाएं सामने आ सकती हैं। दूसरी बात, सरकार के पास अभी जितना भी उपलब्ध अतिरिक्त फंड है, वह जर्जर इमारतों पर लगाना होगा। साथ ही विधायकों और सांसदों को अपना-अपना स्थानीय क्षेत्र विकास का फंड भी इन्हीं कार्यों में लगाना होगा और गुणवत्ता का ध्यान रखना ही पड़ेगा क्योंकि अब वह पुराना राजस्थान नहीं रहा है जहां बहुत कम बारिश होती थी और कमजोर निर्माण आसानी से बारिश को झेल जाता था। बारिश के पैटर्न को देखते हुए यकीन किया जा सकता है कि आने वाले वर्षों में भी राजस्थान में बारिश की कोई कमी नहीं रहेगी और जैसे-जैसे बारिश की मात्रा बढ़ती जाएगी वैसे-वैसे यह पुराने भ्रष्टाचार से बने हुए भवन ढहते जाएंगे। पिछले कुछ वर्षों में सरकारी क्षेत्र में भ्रष्टाचार बेतहाशा बढ़ा है और निर्माण कार्य में यह सबसे ज्यादा हुआ है। सरकार को जिला स्तर पर सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता चेक करवाने के लिए टीमें बनाने की जरूरत है और निश्चित टाइम फ्रेम में इनकी रिपोर्ट आना भी जरूरी है। इसके अलावा किस बिल्डिंग में बच्चों को बिठाना है और किस बिल्डिंग में मरीजों को रखना है, यह संबंधित क्षेत्र के स्कूल, अस्पताल और जहां वे इमीडिएट रिपोर्ट करते हैं, उन अफसरों के विवेक पर भी छोड़ा जाना चाहिए। इस मामले में लापरवाही का मतलब है कि हम बड़े हादसों को खुला निमंत्रण दे रहे हैं।

