सीमावर्ती जिले बाड़मेर में चार साल पहले किया गया एनकाउंटर अब पुलिस वालों को महंगा पड़ने वाला है। पुलिस ने कमलेश प्रजापति का एनकाउंटर किया था। और कमलेश के परिजनों ने फर्जी एनकाउंटर करने के आरोप लगाए। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने इस प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपी थी। सीबीआई ने इस एनकाउंटर को सही मानते हुए अपनी रिपोर्ट पेश की लेकिन कमलेश की पत्नी ने इसे चुनौती देते हुए कोर्ट में याचिका लगाई। कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए एनकाउंटर करने वाले पुलिस अधिकारियों पर हत्या का केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं। वही इस मामले में एसीजेएम कोर्ट ने 2 आईपीएस अधिकारियों सहित कुल 24 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज करने के साथ ही कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी और उनके भाई की भूमिका की जांच के आदेश दिए हैं।मृतक कमलेश प्रजापति के एनकाउंटर के तीन महीने बाद इस मामले को सीबीआई के सुपुर्द किया गया था। सीबीआई ने लंबे समय तक गहन जांच की। सीबीआई ने अपनी जांच में कहा कि प्राप्त किए गए सबूतों से यह कहना बहुत मुश्किल है कि कमलेश प्रजापति को फर्जी एनकाउंटर में मारा गया। सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में मृतक के परिजनों के दावे को खारिज कर दिया था। मार्च 2023 में मृतक कमलेश की पत्नी जसोदा ने कोर्ट में याचिका लगाई कि पूर्व में इस केस की जांच करने वाले पुलिस अधिकारी एएसपी पुष्पेंद्र आढा का कोई पक्ष नहीं रखा गया है। ऐसे में प्रतीत होता है कि सीबीआई ने निष्पक्ष जांच नहीं की। जसोदा के इस दावे के आधार पर कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया।एसीजेएम कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए 2 आईपीएस अधिकारियों सहित कुल 24 पुलिस अफसरों और कर्मियों के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

