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जाट और गुर्जर अब राजस्थान में क्यों आ रहे है साथ ?

जाट और गुर्जर राजस्थान में एक साथ मिलकर एक निर्णायक लडाई लडने की तैयारी कर रहे है .और जाट समाज के नेताओं ने तो अब सीधे तौर पर गुर्जर आरक्षण समिति को अपना समर्थन भी दे दिया है.लेकिन अब ये निर्णायक कदम राजस्थान की राजनीति में क्या बवाल मचाने वाला है ये भी देखना होगा.लेकिन फिलहाल जो समीकरण बन रहे है उससे साफ है कि राजस्थान में गुर्जर और जाट राजस्थान बीजेपी सरकार की मुश्किलें बढाने वाले है..इसी के चलते जाट समाज ने गुर्जरों को समर्थन दे दिया है.गुर्जर आरक्षण समिति के महापंचायत के ऐलान के बाद जाट समाज भी समर्थन में उतर आया है. जाट नेता नेम सिंह फौजदार ने विजय बैंसला को समर्थन का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि जब गुर्जर आरक्षण आंदोलन की बात आई, तब भी जाटों ने समर्थन किया था. आज जब विजय बैंसला ने बयान दिया तो हम भी समर्थन में हैं. फौजदार ने कहा कि जब आंदोलन चरम पर होता है तो सरकार से वादा करती हैं और फिर भूल जाती हैं. वो भूल जाती हैं कि ऐसा कोई वादा भी किया था. फौजदार ने कहा, “पहले भी जितनी जेल बनाई गईं, वो 90 फीसदी जाटों के गांव में बनाए गए. जाट की अहम भूमिका रहीं. हमने हमेशा सहभागिता निभाई है. आज सरकार बनने के बाद 17 महीने हो गए हैं, लेकिन वादा नहीं निभाया गया. यही नहीं, उन्होंने जाट आरक्षण के लिए भी हुंकार भरी हैं. जाट नेता ने समाज से आह्वान करते हुए कहा कि भरतपुर-धौलपुर में जाट आरक्षण की मांग चल रही है. अगर वास्तव में आप चाहते हैं तो शीघ्र ही आरक्षण संघर्ष समिति की बैठक बुलाएंगे. बड़े आंदोलन की रणनीति तय करने पर मजबूर होंगे. वही गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय बैंसला ने राजस्थान सरकार को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर समुदाय की मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आगामी 8 जून को भरतपुर जिले के पीलूपुरा में एक निर्णायक महापंचायत का आयोजन किया जाएगा, जहां भविष्य की रणनीति तय की जाएगी.