राजस्थान के पीलूपुरा में गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष और भाजपा पार्टी सदस्य विजय बैंसला के नेतृत्व में गुर्जर समाज ने महापंचायत की थी। जिसमें सरकार ने गुर्जर समाज की अधिकतर मांगों पर सहमति जताई। बैंसला ने राज्य सरकार पर दबाव बनाने में सफलता पाई और चेतावनी दी कि अगर अति पिछड़ा वर्ग के लिए 5 फीसदी आरक्षण की मांग को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया तो आगे बड़ा आंदोलन करेंगे।जिसके बाद विजय बैंसला को लेकर प्रदेश भाजपा के आंतरिक अनुशासन और नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे थे। लेकिन अब प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने चुप्पी तोड़ दी है। गौरतलब है कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव 2023 में देवली-उनियारा से विजय बैंसला को उम्मीदवार बनाया। हालांकि वे कांग्रेस उम्मीदवार हरीश मीना से हार गए। माना जाता है कि तब से ही पार्टी के भीतर दरकिनार कर दिए गए थे। भाजपा पार्टी सिंबल पर चुनाव लड़ चुके गुर्जर नेता विजय बैंसला की ओर से आंदोलन का नेतृत्व करने के सवाल पर राठौड़ ने कहा कि विजय ने अपनी समाज के लिए मांग उठाई है। मांग रखने का अधिकार सबको है, लेकिन अपनी मांग के लिए जनता को परेशान करना ठीक नहीं है।ऐसे में देखने वाली बात तो ये है कि जहां एक ओर गुर्जर आरक्षण की मांग को लेकर बडे स्तर पर आंदोलन की तैयारी थी.लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ जिसके चलते सारा मामला पलट गया और मात्र 1 दिन के भीतर ही सरकार को मांगें माननी पडी.वही सियासी गलियारों में चर्चाएं है कि विजय बैंसला की ताकत और रणनीति देखकर बीजेपी सरकार के हाथ पांव फूल गए.क्योंकि सरकार एक बार फिर से इस आंदोलन का दाग अपने ऊपर नहीं लेना चाहती थी.और इंटलिजेंस से भी खबरे आ रही थी कि आंदोलन उग्र रुप से ले सकता है ऐसे में बीजेपी सरकार को विजय बैंसला के सामने झुकना पडा और यहां भजनलाल शर्मा शायद वसुंधरा की बराबरी नहीं कर पाए.

