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Homesportsपहले ऑपरेशन सिंदूर, अब भारत-पाकिस्तान मैच… आखिर ऐसी क्या मजबूरी?

पहले ऑपरेशन सिंदूर, अब भारत-पाकिस्तान मैच… आखिर ऐसी क्या मजबूरी?

भारत और पाकिस्तान के बीच आज दुबई में होने वाले क्रिकेट मुकाबले को लेकर इस बार उत्साह नहीं बल्कि गुस्सा देखने को मिल रहा है। देशभर में लोग यही सवाल उठा रहे हैं कि जब हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जवानों ने अपनी जान गंवाई और पहलगाम हमले के घाव अब तक ताजे हैं, तो सरकार और बीसीसीआई की ऐसी क्या मजबूरी है कि यह मैच टाला नहीं जा रहा।

 

जनता और परिवारों का आक्रोश

आतंकवादी हमले में शहीद हुए लोगों के परिजन खासतौर पर नाराज़ हैं। उनका कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है, तब तक किसी भी तरह का खेल आयोजन स्वीकार्य नहीं है। आमजन से लेकर विपक्ष तक, सभी सरकार और क्रिकेट बोर्ड पर लोगों की भावनाओं को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगा रहे हैं।

राजनीतिक और खेल जगत की प्रतिक्रियाएं

  • पूर्व क्रिकेटर और बीजेपी नेता केदार जाधव ने कहा, “भारत को पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में नहीं उतरना चाहिए।

  • सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल उठाया कि क्या करोड़ों रुपये की कमाई उन 26 जानों से ज्यादा कीमती है? उन्होंने पीएम मोदी की पुरानी बात याद दिलाई—“खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते, संवाद और आतंक साथ नहीं चल सकते।”

    सरकार और बीसीसीआई पर सवाल

    अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार और बीसीसीआई खेल को महज़ व्यावसायिक लाभ की नजर से देख रहे हैं, या फिर देशवासियों की भावनाओं की कीमत पर पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलना उनकी मजबूरी बन गया है

    आज रात होने वाले इस मुकाबले से पहले ही यह बहस तेज हो चुकी है कि क्या खेल को खेल की भावना से देखा जाए या फिर आतंकवाद से प्रभावित परिवारों की पीड़ा को प्राथमिकता दी जाए।

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