जयपुर, 3 अक्टूबर।
दुनिया में तेजी से फैल रहा MPOX Clade 1 वायरस, जिसे पहले मंकीपॉक्स कहा जाता था, भारत के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। अफ्रीका में जानवरों (विशेषकर चूहे, गिलहरी जैसे जंगली जीवों) से फैलने वाले इस संक्रमण का नया वेरिएंट अब गंदे पानी और नालों के जरिए फैल रहा है।
हाल ही में वाशिंगटन राज्य के पियर्स काउंटी के अपशिष्ट जल के नमूनों में MPOX Clade 1 के अंश पाए गए। हेल्थ डिपार्टमेंट और CDC ने इस संबंध में 24 सितंबर को रिपोर्ट जारी की थी। भारत में इस वेरिएंट का पहला मामला वर्ष 2024 में केरल में दर्ज किया गया था।
एमपॉक्स वायरस क्या है?
एमपॉक्स एक वायरल संक्रमण है, जिसे पहले मंकीपॉक्स कहा जाता था। यह चेचक (Smallpox) जैसा रोग है। इसके दो प्रकार हैं – MPOX Clade 1 और MPOX Clade 2, दोनों ही भारत के लिए खतरनाक माने जा रहे हैं।
मुख्य लक्षण:
तेज बुखार और सिरदर्द
मांसपेशियों व शरीर में दर्द
सूजी हुई लिम्फ नोड्स (ग्लैंड्स)
थकान
त्वचा पर चकत्ते/दाने, जो फफोले और पपड़ी में बदल जाते हैं
संक्रमण कैसे फैलता है?
संक्रमित व्यक्ति से त्वचा-से-त्वचा का सीधा संपर्क
खासकर यौन संपर्क
दूषित सतहों और वस्त्रों से संक्रमण
गंदे पानी और अपशिष्ट से फैलने की संभावना
भारत के लिए खतरा क्यों?
एनवायरमेंटल परफॉर्मेंस इंडेक्स (Wastewater Treatment) में भारत का स्थान 94वां है, जबकि अमेरिका 32वें स्थान पर है। यह दर्शाता है कि भारत में वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट की स्थिति कमजोर है। ऐसे में यदि वायरस नालों और गंदे पानी के जरिए फैला, तो संक्रमण का जोखिम काफी बढ़ सकता है।
उपचार और वैक्सीन
फिलहाल एमपॉक्स के लिए कोई विशेष एंटीवायरल दवा स्वीकृत नहीं है। गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं के लिए डॉक्टर एंटीवायरल दवाएँ जैसे:
Tecovirimat (TPOXX)
Cidofovir / Brincidofovir
Vaccinia Immune Globulin (VIG-IV)
का उपयोग कर सकते हैं। हालाँकि, इनकी प्रभावशीलता पर अभी शोध जारी है।
रोकथाम कैसे करें?
संक्रमण के खतरे वाले लोगों को समय पर टीका लगवाना चाहिए।
भीड़भाड़ वाली जगहों (क्लब, पार्टियाँ आदि) में नज़दीकी संपर्क से बचें।
एमपॉक्स के चकत्ते या फफोले को न छुएँ।
संक्रमित बिस्तर, कपड़े या सतहों के संपर्क से बचें।
साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोएँ।
विशेषज्ञों का कहना है कि MPOX Clade 1 का फैलाव रोकने के लिए भारत को स्वास्थ्य ढांचे और वेस्ट वॉटर प्रबंधन पर तुरंत ध्यान देना होगा। समय पर सावधानी और सतर्कता ही इस खतरनाक वेरिएंट से सुरक्षा का सबसे बड़ा हथियार है।
यह भी पढ़े – ग्राम सेवा सहकारी समितियों के गठन की प्रक्रिया अब ऑनलाइन

