कई लोग अपनी कार का कलर बदलवाने का मन बना लेते हैं—कभी स्टाइल के लिए, कभी अलग लुक के लिए। लेकिन रंग बदलने से पहले एक ज़रूरी प्रक्रिया (Procedure) को फॉलो करना पड़ता है। अगर आपने बिना नियमों के गाड़ी का रंग बदलवा लिया, तो RC मिसमैच की वजह से आपका चालान कट सकता है और इंश्योरेंस क्लेम भी रिजेक्ट हो सकता है।
क्यों जरूरी है RTO को Inform करना?
मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार, कार का रंग बदलना बिल्कुल लीगल है, लेकिन इसके लिए आपको RTO को सूचित करना अनिवार्य है।
रंग बदलने के बाद RC में नया रंग अपडेट किया जाता है। अगर ये अपडेट नहीं है और पुलिस चेकिंग में कार का रंग RC से मेल नहीं खाता, तो सीधा चालान लग सकता है।
Car Color Change Procedure (गाड़ी का रंग बदलने की आधिकारिक प्रक्रिया)
1. RTO जाकर NAMV फॉर्म भरें
सबसे पहले अपने नज़दीकी RTO ऑफिस जाना होगा।
यहां आपको NAMV (Notice for Alteration in Motor Vehicle) Form भरना है।
इसमें जरूरी डिटेल्स भरें:
मालिक का नाम
गाड़ी का मॉडल
पहले का रंग
नया चुना हुआ रंग (Exact Shade—जैसे: Red Wine, Pearl White आदि)
ध्यान रखें—जो शेड लिखें, वही करवाएं।
गलत शेड होने पर RC अपडेट में दिक्कत आ सकती है।
2. ज़रूरी डॉक्यूमेंट जमा करें
RC (Registration Certificate)
PUC Certificate
Insurance Copy
Identity Proof
NAMV Form
इसके साथ एक छोटा सा Service Charge भी जमा करना होता है।
3. RTO की Approval प्रक्रिया
RTO अधिकारी आपकी कलर-चेंज रिक्वेस्ट को Approve या Reject कर सकते हैं।
Approval मिलने के बाद ही कार वर्कशॉप पर जाएं और नया रंग पेंट करवाएं या रैप लगवाएं।
4. Painting / Wrapping करवाने के बाद Inspection
जब गाड़ी का रंग बदल जाए, तो:
कार को RTO में इंस्पेक्शन के लिए पेश करें
अधिकारी चेक करेंगे कि फॉर्म में लिखा शेड और कार पर किया गया रंग एक जैसा है या नहीं
इसके बाद RTO आपकी RC में नया रंग अपडेट कर देगा
अब आप बिना किसी टेंशन के कार चला सकते हैं।
इन बातों का खास ध्यान रखें
✔️ सरकारी गाड़ियों जैसे रंग न चुनें
पुलिस, एंबुलेंस या सरकारी विभाग की गाड़ियों से मिलता-जुलता रंग ना लें।
✔️ High-Quality पेंटिंग या Vinyl Wrapping कराएं
ताकि गाड़ी की रिसेल वैल्यू कम न हो।
✔️ RC Update कराना जरूरी
रिसेल और इंश्योरेंस क्लेम—दोनों में RC अपडेट आवश्यक है।
✔️ इंश्योरेंस कंपनी को Inform करें
कई इंश्योरेंस पॉलिसियों में रंग बदलने की जानकारी देना जरूरी होता है।
नहीं बताने पर क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।

