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बच्चों पर हर समय गुस्सा और डांट? पढ़ाई और खेल—दोनों में बिगड़ सकती है परफॉर्मेंस

अक्सर माता-पिता यह सोचते हैं कि बच्चों पर सख्ती, डांट या गुस्सा करने से वे पढ़ाई और खेल में बेहतर प्रदर्शन करेंगे। लेकिन मनोवैज्ञानिकों और बाल विशेषज्ञों की मानें तो लगातार डांट-फटकार बच्चों को सुधारती नहीं, बल्कि उनके मानसिक और भावनात्मक विकास को नुकसान पहुंचाती है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई, खेल और आत्मविश्वास पर पड़ता है।

गुस्से का असर दिमाग पर

बार-बार डांट या डर से बच्चों का स्ट्रेस हार्मोन (कॉर्टिसोल) बढ़ जाता है
बार-बार डांट या डर से बच्चों का स्ट्रेस हार्मोन (कॉर्टिसोल) बढ़ जाता है

 

बच्चों का दिमाग बहुत संवेदनशील होता है। जब उन्हें बार-बार डांटा या डराया जाता है, तो उनके शरीर में स्ट्रेस हार्मोन (कॉर्टिसोल) बढ़ जाता है। इससे एकाग्रता, याददाश्त और निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है। ऐसे बच्चे क्लासरूम में ध्यान नहीं लगा पाते और खेल के मैदान में भी अपना बेस्ट नहीं दे पाते।

आत्मविश्वास होता है कमजोर

लगातार गुस्से और आलोचना से बच्चों को यह लगने लगता है कि वे कुछ भी सही नहीं कर सकते। धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास टूटने लगता है। ऐसे बच्चे नई चीजें सीखने या प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने से डरने लगते हैं, जिससे उनका टैलेंट दब जाता है।

पढ़ाई में क्यों गिरती है परफॉर्मेंस

डांट के डर से बच्चे पढ़ाई तो करते हैं, लेकिन वह सीखने के लिए नहीं बल्कि डर से होती है। इससे रटने की आदत बनती है, समझ विकसित नहीं हो पाती। परीक्षा में तनाव बढ़ता है और गलती करने का डर उन्हें और कमजोर कर देता है।

खेल में भी दिखता है असर

खेल के दौरान आत्मविश्वास, फोकस और आनंद बहुत जरूरी होता है। जो बच्चे घर में लगातार डांट सुनते हैं, वे मैदान में भी डर और दबाव में खेलते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि वे अपनी क्षमता के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पाते।

व्यवहार में आने लगते हैं बदलाव

व्यवहार में आने लगते हैं बदलाव Image from kidsvillepeds
व्यवहार में आने लगते हैं बदलाव Image from kidsvillepeds

लगातार गुस्से का सामना करने वाले बच्चों में

  • चिड़चिड़ापन

  • जिद

  • झूठ बोलने की आदत

  • गुस्सा या चुप्पापन
    जैसे व्यवहार देखने को मिल सकते हैं। कई बार बच्चे खुद पर गुस्सा निकालने लगते हैं या दूसरों से कटने लगते हैं।

तो क्या करें माता-पिता?

बच्चों को सुधारने के लिए गुस्सा नहीं, संवाद और समझदारी ज्यादा कारगर होती है।

  • बच्चे से शांत होकर बात करें

  • उसकी गलती पर उसे समझाएं, अपमान न करें

  • उसकी कोशिश की तारीफ करें, सिर्फ रिजल्ट की नहीं

  • पढ़ाई और खेल में दबाव नहीं, सहयोग दें

  • उसे गलती करने और सीखने का मौका दें

सकारात्मक माहौल से निखरता है बच्चा

माता-पिता का गुस्सा बच्चों की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचाता है Image from Shutterstock
माता-पिता का गुस्सा बच्चों की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचाता है Image from Shutterstock

 

जिस घर में बच्चे को सुना जाता है, समझा जाता है और प्रोत्साहित किया जाता है, वहां बच्चा खुलकर सीखता है और बेहतर परफॉर्म करता है। प्यार, धैर्य और सही मार्गदर्शन से न सिर्फ पढ़ाई बल्कि खेल और जीवन—हर क्षेत्र में बच्चा आगे बढ़ता है।

निष्कर्ष

बच्चों पर लगातार गुस्सा और डांट उनकी पढ़ाई और खेल दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है। सुधार का रास्ता सख्ती नहीं, बल्कि समझ, संवाद और सकारात्मक सोच से होकर गुजरता है। अगर हम बच्चों को सुरक्षित और सहयोगी माहौल देंगे, तो वे खुद-ब-खुद बेहतर बनेंगे।

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