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क्या एक बार फिर भड़क सकती है गुर्जर आंदोलन की आग ?

8 जून 2025 को राजस्थान में गुर्जर आरक्षण आंदोलन ने एक बार फिर जोर पकड़ा, जिससे राज्य में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। भरतपुर जिले के पीलूपुरा में आयोजित ‘फैसला महापंचायत’ में गुर्जर नेता विजय बैंसला ने स्पष्ट किया कि अबकी बार वे अपना हक लेकर ही लौटेंगे। उन्होंने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि अब और धैर्य नहीं रखा जाएगा और आंदोलन को और तेज किया जाएगा। महापंचायत में यह भी स्पष्ट किया गया कि केवल अध्यक्ष के आदेश को ही मान्यता दी जाएगी। महापंचायत के बाद आंदोलनकारियों ने हिंडोन-बयाना हाईवे के किनारे ट्रेनें रोक दीं और रेलवे ट्रैक जाम कर दिया, जिससे रेल यातायात प्रभावित हुआ। सवाई माधोपुर में भी आंदोलन की चपेट में आकर दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग बाधित हो गया है। प्रशासन और रेलवे विभाग अलर्ट मोड पर हैं और सवाई माधोपुर जंक्शन पर ट्रेनों को रोकने के आदेश दिए गए हैं। इससे पहले, सरकार और गुर्जर नेता कर्नल बैंसला के बीच एक मसौदे पर सहमति बनी थी, जिसमें समुदाय की मुख्य मांगों को शामिल किया गया था। हालांकि, इसके बावजूद आंदोलन रुका नहीं और समुदाय के कुछ सदस्य सरकार और बैंसला के बीच बनी सहमति से असंतुष्ट हैं। उन्हें लगता है कि उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हुई हैं या सरकार की प्रतिबद्धता पर भरोसा नहीं किया जा सकता गुर्जर समाज की प्रमुख मांगें अब तक पूरी नहीं हुई हैं, जिससे समुदाय में असंतोष बढ़ रहा है। प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है और सभी पक्षों से संयम बरतने को कहा है। यह आंदोलन राजस्थान में सामाजिक और राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकता है, जिससे आगामी समय में सरकार पर दबाव बढ़ेगा। गुर्जर आरक्षण आंदोलन का इतिहास 2006 से शुरू होता है, जब गुर्जर समाज ने एसटी में शामिल करने की मांग को लेकर पहली बार आंदोलन किया था। तब से लेकर अब तक कई बार बड़े आंदोलन हो चुके हैं, जिनमें से कुछ हिंसक भी रहे हैं। इस दौरान भाजपा और कांग्रेस दोनों की सरकारें रहीं, मगर किसी सरकार से गुर्जर आरक्षण आंदोलन की समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकला। यह आंदोलन अब एक निर्णायक मोड़ पर है, और सरकार के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण समय है। यदि सरकार ने समय रहते उचित निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन और तेज हो सकता है, जिससे राज्य में सामाजिक और राजनीतिक माहौल प्रभावित हो सकता है।