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राजस्थान में मंत्री विधायकों के दावे फुस्स.. अफसर हो गए और पावरफुल

तकरीबन डेढ साल पहले प्रदेश की सत्ता में काबिज हुई भजनलाल सरकार भी अफसरशाही के आगे असहाय नजर आ रही है .पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के शासन में धमक रखने वाले अफसरों का अब भी दबदबा कायम है.हाल ही में आई आईएएस अफसरों के तबादला सूचि के एनालिसिस से पता चलता है कि प्रदेश के शासन को इंस्पेक्टर राज का तमगा दे दिया जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी.दरअसल बडे अफसरों के रवैए से खिन्नाए बीजेपी सरकार के मंत्री और विधायकों के दावे इस आईएएस लिस्ट को देखकर फुस्स होते नजर आ रहे है .जिन विभागों में मंत्रियों से तकरार थी उनको हटा तो दिया गया मगर उन्हे और पावरफुल बना कर साफ मैसेज दे दिया है कि राजस्थान में अफसरों का ही दबदबा रहेगा.दिल्ली से लेकर जयपुर तक बीजेपी संगठन व आरएसएस में भी अब भी सब कुछ सही नहीं चल रहा है.लोकसभा चुनाव के बाद पड़ी दरार भरने के लिए दोनों पक्षों ने आगे बढ कर सुलह करते हुए नागपुर में साफ किया था कि संघ एक विचार है जिसकी मेहनत से पार्टी मजबूत होती है.मगर कुछ मामलों में सामने आया कि अब संघ के प्रांतीय पदाधिकारी राजनीति के साथ ही नौकरशाही में दखल दे रहे है.जिससे भविष्य में हालात विकट हो सकते है .इस सुलह के बावजूद संघ की ओर से निकले एक आईएएस का मुख्यमंत्री कार्यालय से विदाई की सुगबुगाहट थी मगर उनको यथावत रख कर और पावरफुल बना देना बताता है कि उनकी दिल्ली में फील्डिंग मजबूत है.नौकरशाही से जूझ रहे राजस्थान में अफसरों की कमी नहीं है मगर अफसरों की एक बडी लॉबी ..अंधा बांटे रेवडी फिर फिर अपनो को देय की तर्ज पर अपनी लॉबी वाले अफसरो को बडे विभागों के अतिरिक्त प्रभार दिलाकर बाकी को हाशिए पर पटक दिया है.वही एक बडी लॉबी सरकार को गुमराह करते हुए पुलिस व्यवस्था के निर्णयों को प्रभावित कर रही है.पिछली सरकार में तत्कालीन एजीडी इंटिलिजेंस प्रतिदिन सीएम से संवाद रखते थे.मगर मौजूदा सरकार में अब एक जूनियर अधिकारी ने इस व्यवस्था को भी भंग करवा दिया है.वही अगर जल्द सरकार ने अफसरशाही पर कंट्रोल नहीं किया तो अगली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे से भी जनता परहेज करेगी.क्योंकि सरकार की योजनाओं को अफसर ही जनता तक धरातल पर पहुंचाते है.वो ही आउट ऑफ कंट्रोल हो गए तो प्रदेश के कई नेताओं की सियासी जमीन भी खतरे में पड सकती है.