राजस्थान में गुर्जर आंदोलन तो फिलहाल कुछ समय के लिए विराम हो गया है.लेकिन अब इस पर नेताओं के आरोप प्रत्यारोप भी शुरु हो गये है .आंदोलन में अचानक हुए बदलाव और बड़ी रणनीति पर लगे विराम पर लगातार सवाल उठाए जा रहे है.वही जब महापंचायत में सरकार ने आंदोलनकर्ताओं की बात मान ली और सब कुछ ठीक हो गया था,लेकिन इसी बीच कुछ युवाओं द्वारा ट्रेन रोकने और पटरियों को क्षतिग्रस्त करने का प्रयास किया गया.वही अब इस पूरे मामले पर बीजेपी के प्रदेशअध्यक्ष ने बडा बयान दिया और इसे कांग्रेस नेताओं की साजिश करार दे दिया.. राजस्थान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने गुर्जर आंदोलन को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस आंदोलन को “प्रायोजित” बताते हुए आरोप लगाया कि इसके पीछे कांग्रेस नेताओं की साजिश हो सकती है। उनका इशारा खास तौर पर हाल ही में हुई सचिन पायलट और अशोक गहलोत की मुलाकात की ओर था, जिसे उन्होंने संदेह के घेरे में रखा। राठौड़ ने कहा कि अगर इस मुलाकात का नतीजा पीलूपुरा में उग्र आंदोलन के रूप में सामने आया है, तो यह “दुर्भाग्यपूर्ण” और “निंदनीय” है।राठौड़ ने कहा कि गुर्जर आंदोलन अक्सर भाजपा सरकार के समय में ही क्यों उग्र होता है, जबकि कांग्रेस के शासन में ऐसा देखने को नहीं मिलता? इससे उनका सीधा संकेत था कि आंदोलन के पीछे कोई “राजनीतिक खेल” हो सकता है।उन्होंने कांग्रेस पर कानून-व्यवस्था को जानबूझकर बिगाड़ने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा सरकार ने स्थिति को नियंत्रण में रखा है। उन्होंने यह भी दोहराया कि प्रदर्शन का अधिकार सबको है, लेकिन जनजीवन को बाधित करना गलत है।मदन राठौड़ ने गुर्जर नेता विजय बैंसला की मांगों का समर्थन किया, पर आंदोलन के तरीके को अनुचित बताया।उन्होंने कांग्रेस को सलाह दी कि पार्टी पहले अपना घर संभाले। गोविंद सिंह डोटासरा पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अपने ही क्षेत्र में पार्टी उम्मीदवार को जिताने में नाकाम रहे हैं।राठौड़ ने हाल ही में हुए पंचायती राज और नगर निकाय उपचुनावों में भाजपा की सफलता का ज़िक्र किया, जिसमें पार्टी ने 28 सीटों पर जीत दर्ज की। उन्होंने इसे भजनलाल शर्मा सरकार की नीतियों और विकास कार्यों पर जनता की मुहर बताया।मदन राठौड़ का यह बयान स्पष्ट रूप से आगामी राजनीतिक रणनीति और गुर्जर आंदोलन के संभावित प्रभावों को लेकर सावधानीपूर्ण मोर्चाबंदी का संकेत देता है। भाजपा इसे कांग्रेस द्वारा प्रायोजित अस्थिरता की कोशिश बता रही है, वहीं आंदोलन के तरीके को लेकर एक संतुलित आलोचना भी सामने रखी गई है।
Previous article

