हनुमान बेनीवाल ने एक बार फिर वसुंधरा राजे के खिलाफ बयानबाजी तेज कर दी है .इस बार उन्होने वसुंधरा को लेकर ऐसा बयान दिया है जिसके बाद सियासी गलियारों में बवाल मचा हुआ है.माना जाता है कि बेनीवाल हमेशा से राजनीति में वसुंधरा के धुर विरोधी रहे है .हालांकि पिछले कुछ समय से वो वसुंधरा राजे पर कोई टिका टिप्पणी नही कर रहे थे.लेकिन जब वो जाट आदोंलन में शामिल होने पहुंचे तो यहां एक बार फिर से वसुंधरा को लेकर एक बडा बयान दे दिया है….बेनीवाल ने ये बयान भी जगह और परिस्थिति के अनुरुप दिया है….दरअसल जब राजस्थान में गुर्जर आंदोलन हुआ था तब वसुंधरा राजे की सरकार थी.उसमें आंदोलन करने वाले गुर्जर समाज के नेताओं पर गोलिया भी चलवाई गई थी.वही जब एक बार फिर से राजस्थान में आरक्षण की चिंकारी भभक रही है .तो बेनीवाल भी राजे को घेरने का कोई मौका नहीं छोडना चाहते .ऐसे में बेनीवाल ने जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान जो बयान दिया उसके भी कई मायने है इस बयान के जरिए बेनीवाल ने वसुंधरा सरकार के समय दिए गए जख्मों को भी ताजा किया है. जाट समाज की हुंकार सभा में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने खुद को मुख्यमंत्री की कुर्सी का दावेदार बताया. हनुमान बेनीवाल ने कहा कि उन्होंने कभी मंत्री बनने की चाह नहीं रखी. उन्होंने कहा, “जो मेरा थैला उठाते थे वो दो-दो बार मंत्री बन गए. लेकिन मुझे उस कुर्सी की तलाश है, जिस पर बैठते ही लाखों लोगों का भला हो और वो कुर्सी है मुख्यमंत्री की.”हनुमान बेनीवाल ने मुख्यमंत्री बनने को लेकर कहा, “अगर मुख्यमंत्री मेरा भाई बन जाए तो मैं बारात में जाने को तैयार हूं. दूल्हा बनना मंजूर है, लेकिन दुल्हन यानी उप मुख्यमंत्री नहीं बनूंगा. उन्होंने कहा कि राजनीति में अपने विरोधियों को घर बैठाया है. मैंने वसुंधराजी को घर बैठा दिया. 2003 में वसुंधरा राजे ने उन्हें नागौर से टिकट देने की बात कही थी. लेकिन, उन्होंने अपने पिता की पारंपरिक सीट मूंडवा से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई. जब टिकट नहीं मिला तो उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और हार गए. मैं हार गया लेकिन घर नहीं बैठा. लड़ते-लड़ते उन्हें घर बैठा दिया.” पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान भजनलाल शर्मा सरकार को गिराने की साजिश हो रही है, पर बेनीवाल ने पलटवार किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सिर्फ बयानों से काम चला रही है. अगर षड्यंत्र हो रहा है तो गहलोत जी को जरूर पता होगा, क्योंकि पिछली बार सरकार गिरने के वक्त वसुंधरा जी ने ही आठ विधायक दिए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के कुछ बड़े नेता आज भी कांग्रेस से रात के अंधेरे में मुलाकात करते हैं,

