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मोदी को साइप्रस यात्रा के दौरान मिला सर्वोच्च सम्मान !

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साइप्रस दौरे पर है.ऐसे में पीएम मोदी ऐसे वक्त साइप्रस की यात्रा पर जब भारत और तुर्की के संबंध तनावपूर्ण स्थिति में है.इसके अलावा तुर्की और साइप्रस के बीच भी विवाद रहा है .पीएम मोदी की साइप्रस यात्रा को पाकिस्तान और तुर्की के बीच मजबूत संबंधों को जोडकर भी देखा जा रहा है .बीते महीने ही भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष के दौरान तुर्की ने खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया था….ऐसे में अब तुर्की को घेरने के लिए और कूटनीतिक रणनीति के तहत पीएम मोदी की साइप्रस यात्रा बेहद अहम मानी जा रही है .बात करे साइप्रस देश की तो यह तुर्की के दक्षिण में.और इजरायल के उत्तर पश्चिम स्थित है .यहां तुर्की और ग्रीक समुदाय के लोग रहते है .जिनके बीच लंबे समय से नस्लीय विवाद रहा है .साल 1974 में ग्रीक लडाकों की ओर तख्तापलट की कोशिश में तुर्की की सेना ने इस द्वीप पर आक्रमण किया था.इसके बाद तुर्की ने साइप्रस के एक शहर को अपने कब्जे में ले लिया था.आपको बता दे अभी भी तुर्की ने यहां 35 हजार से अधिक सैनिक यहां पर तैनात किये हुए है .इस घटना के बाद से द्वीप दो हिस्सों में बंटा हुआ है .आपको बता दे भारत ने हमेशा से ही साइप्रस के समर्थन में तुर्की के खिलाफ बयानबाजी की है और जिस तरह से तुर्की ने साइप्रस के शहर पर कब्जा जमाए बैठा है उसका भी भारत ने विरोध किया है.वही आपको बता दे भारत के अलावा इजरायल भी साइप्रस के साथ हमेशा खडा दिखता है .और तुर्की के सैन्य कब्जे को लेकर विरोध जताता रहा है .ऐसे में अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साइप्रस दौरे की तो यह काफी अहम हो जाता है और पीएम मोदी काफी अहम समय पर ही यहां यात्रा कर रहे है .वही कुछ रिपोर्ट ये भी सामने आई है कि आगामी दिनों में साइप्रस और तुर्की के बीच सैन्य टकराव देखने को मिल सकता है .ऐसे में भारत भी अपनी बडी रणनीति के तहत तुर्की से बदला लेने के लिए साइप्रस को हथियार और रणनीतिक सहयोग कर सकता है .हालांकि जिस तरह से तमाम देश युद्ध की तरफ बढ रहे है उससे साफ जाहिर है कि आने वाले समय में अगली जंग साइप्रस और तुर्की के बीच भी हो सकती है जहां भारत खुलकर साइप्रस का समर्थन करेगा.वही दूसरी तरफ इजरायल भी भारत के साथ मिलकर साइप्रस को सहयोग कर सकता है .