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हर कोई इंदिरा गांधी नहीं हो सकता ,पीओके हमारा हो सकता था !

पहलगाम आतंकी घटना के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसे हालात बन गए थे. लेकिन, वर्तमान मे अब युद्ध विराम की स्थिति है. बावजूद इसके भारत और पाकिस्तान के बीच स्थित अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है. सीजफायर की घोषणा तो कर दी गई है, लेकिन भारतीय सेना पाकिस्तान की हर हरकत पर पैनी नजर रखे हुए है. अगर पाकिस्तान ने कोई भी गुस्ताखी करने की कोशिश की तो उसका मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी भी है. वहीं, सीजफायर की घोषणा के बाद युद्ध काल में मोटे तौर पर देश में ठंडी पड़ी राजनीति फिर से गर्म होती दिख रही है. इस बार सीजफायर को टारगेट करते हुए कथित तौर पर कांग्रेस की ओर से जगह-जगह पोस्टर लगाए गए हैं और इसमें वर्तमान केंद्र सरकार के नेतृत्व की तुलना भूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की लीडरशिप से की गई है. इस पोस्टर में कुछ पंक्तियां भी लिखी गई हैं जिसमें सीधे तौर पर केंद्रीय सरकार के नेतृत्व पर निशाना साधा गया है.कई जगहों पर लगाए गए पोस्टर में लिखा गया है- मां तुझे सलाम, हर कोई इंदिरा गांधी नहीं हो सकता! जाहिर तौर पर यह कांग्रेस की ओर से वर्तमान केंद्रीय सरकार के नेतृत्व की ओर संकेत है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार पर तंज भरा कटाक्ष है. बता दें शनिवार को पाकिस्तान के डीजीएमओ की अपील पर भारत सरकार ने युद्ध विराम पर अपनी सहमति जताई और सीजफायर लागू हो गया. अब इसको लेकर जहां कई राजनीतिक दल सही कदम बता रहे हैं, वहीं कई सियासी पार्टियां नरेंद्र मोदी सरकार को अपने टारगेट पर ले रहीं हैं. इनका कहना है कि पाकिस्तान को अभी और सबक सिखाया जाना था और सीज फायर नहीं करना था. यही नहीं, मामले में अपरोक्ष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका को आगे रखते हुए कई नेता और राजनीतिक पार्टियां केंद्र सरकार पर हमले कर रही है.वही आपको बता दे देश जनता का एक धडा जमकर मोदी सरकार के फैसले की आलोचना कर रहा है कि उनका कहना है कि 56 इंच वाले मोदी पीओके को वापस लाने की बड़ी बडी बाते करते थे.लेकिन किसी तीसरे पक्ष ने आकर बोल दिया युद्ध रोको तो मोदी जी डर गए.वही कुछ लोगों का कहना है कि जब युद्ध की तैयारी थी तो पीछे कदम क्यों लिये भारतीय लगातार पाकिस्तान को जवाब दे रही थी फिर भी मोदी सरकार ने देश के लोगों की भावना आहत करने का काम किया और हमारी सेना को कार्रवाई करने से रोक दिया.जिसके चलते आज पाकिस्तान तो जीत का जश्न मना रहा है वही भारत के लोग अभी तक ये समझ नहीं पा रहे कि आखिर हम जीते या फिर हारे क्योंकि हमारी उम्मीद इससे कुछ बडी थी.