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संयुक्त राष्ट्र महासभा में ट्रंप का तीखा भाषण: भारत-चीन से लेकर यूरोप तक सभी पर निशाना

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNO) के 80वें सत्र में अपने लंबे भाषण से फिर सुर्खियाँ बटोरीं। उन्होंने वैश्विक समस्याओं का जिम्मा UNO पर डालते हुए इस संस्था की कड़ी आलोचना की।

UNO को ठहराया जिम्मेदार

ट्रंप ने कहा कि UNO युद्ध और प्रवासन जैसे गंभीर मुद्दों को सुलझाने में पूरी तरह नाकाम रहा है। उन्होंने संस्था को “खोखले शब्दों का मंच” बताते हुए व्यंग्य किया और दावा किया कि यह किसी भी समस्या का वास्तविक समाधान नहीं कर पा रहा।

भारत, चीन और रूस पर सीधा आरोप

अपने तय समय से चार गुना अधिक देर तक चले भाषण में ट्रंप ने भारत और चीन पर आरोप लगाया कि वे रूसी तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध को आर्थिक सहयोग दे रहे हैं। उन्होंने यूरोपीय देशों को भी चेतावनी देते हुए कहा कि वे मास्को से ऊर्जा खरीदना बंद करें।

इमिग्रेशन पॉलिसी पर भी सवाल

ट्रंप ने कई देशों की इमिग्रेशन नीतियों की आलोचना करते हुए UNO को जिम्मेदार ठहराया कि उसने इस चुनौती को नियंत्रित करने में कोई ठोस कदम नहीं उठाए।

रूस-यूक्रेन युद्ध पर दोहरा रवैया

रूस पर सख्त हमले करने के तुरंत बाद ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की और विश्वास जताया कि नाटो की मदद से यूक्रेन अपने खोए हुए सभी क्षेत्र वापस ले सकता है। उनकी यह स्थिति उनकी कथनी और करनी के विरोधाभास को दर्शाती है।

नोबेल शांति पुरस्कार की चाहत

ट्रंप ने UNO के मंच से ही नोबेल शांति पुरस्कार पाने की इच्छा दोहराई। उन्होंने दावा किया कि व्हाइट हाउस लौटने के बाद से उन्होंने सात युद्ध खत्म किए हैं और खुद को शांति का दूत साबित करने की कोशिश की।

निष्कर्ष

डोनाल्ड ट्रंप का यह भाषण उनके पुराने अंदाज की ही झलक दिखाता है—जहाँ वे वैश्विक संकटों के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराते हैं और खुद को समाधानकर्ता के रूप में प्रस्तुत करते हैं। UNO पर सवाल उठाने से लेकर नोबेल शांति पुरस्कार की मांग तक, ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया को चर्चा का विषय दे दिया है।

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