राजस्थान के दौसा जिले से एक दिल को छू लेने वाली घटना सामने आई है. ट्रेनी सब इंस्पेक्टर राजेंद्र सैनी की अचानक मौत के बाद उनकी व्हाट्सएप चैट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. इस चैट में राजेंद्र ने अपने साथी ट्रेनी एसआई के ग्रुप में अपनी परेशानियां साझा की थीं, जो उनकी जिंदगी की कठिनाइयों से जुड़ी हुई थी. परिवार की आर्थिक तंगी, पिता की गंभीर बीमारी और भविष्य की चिंताओं ने उन्हें इतना परेशान कर दिया था कि उन्होंने लिखा, “क्या करूं, कुछ समझ में नहीं आ रहा.”
मौत से ठीक पहले राजेंद्र ने ग्रुप में अपनी व्यथा बयां की. उन्होंने लिखा कि ”मैं मेरी शादी करूं या सिस्टर की या आगे की पढ़ाई करूं, कुछ समझ नहीं आ रहा. पापा की तबीयत ऐसी है कि कब स्वर्ग सिधार जाए पता नहीं”. इसको लेकर राजेंद्र सैनी लगातार परेशान चल रहे थे. वे एक तरफ अपनी शादी, बहन की शादी और आगे की पढ़ाई के बीच फंसे हुए थे, वहीं पिता की हालत ने उन्हें और परेशान कर दिया था. ले चैट से साफ है कि वे गहरे संकट में थे. परिवार और सहयोगियों का कहना है कि राजेंद्र हमेशा हंसमुख रहते थे, लेकिन अंदर ही अंदर वे अपनी चिंताओं से जूझ रहे थे.
उनके पिता लंबे समय से बीमार चल रहे थे, जिससे परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ गया था. ट्रेनिंग के दौरान भी वे परिवार का सहारा बनने की कोशिश कर रहे थे. राजेंद्र के परिवार ने कहा कि हमारा बेटा बहुत संघर्षी था, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया.सब इंस्पेक्टर भर्ती 2021 में चयनित राजेंद्र सैनी रैंक 162 निवासी भरतपुर,हाल पोस्टेड धौलपुर की मौत ने सवाल खड़े कर दिए हैं ।
प्रथम दृष्टया मामला खुदकुशी का बताया जा रहा है ।जानकारों के मुताबिक राजेंद्र SI भर्ती को रद्द किए जाने के हाईकोर्ट के फैसले के बाद से गहरे अवसाद में था ।अवसाद की स्थिति में ही उसने दौसा स्टेशन के पास माल गाड़ी के आगे आकर सुसाइड कर लिया ।राजेंद्र सैनी की सब इंस्पेक्टर परीक्षा – 2018 में भी टॉप 200 में रैंक थी लेकिन पद कम होने की वजह से फाइनल सलेक्शन नहीं हो पाया था । 2023 में फर्स्ट ग्रेड में चयनित हुआ लेकिन वर्दी के जुनून में पहले से सब इंस्पेक्टर जॉइन कर चुका था इसलिए उसने उसको जॉइन ही नहीं किया था । ऐसे में SI भर्ती 2021 रद्द होने के फैसले से अनिश्चितता के भंवर में डूबे राजेंद्र द्वारा मौत को गले लगाने की आशंका है ।उसके पिता बीमार हैं और परिवार में बड़ा बेटा होने के नाते उस पर छोटे भाई ,बहन ही नहीं सभी तरह की बड़ी जिम्मेदारियां थी ।अवसाद की यह स्थिति अकेले राजेंद्र की नहीं ,मेहनत के बूते SI बने कई नौजवानों की है ।
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