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पिपलांत्री में किया जल ग्रहण प्रशिक्षण केंद्र और सरफेस बेरियर का लोकार्पण

शिक्षा एवं पंचायतीराज मंत्री का राजसमंद दौरा

शिक्षा एवं पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर
व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया

पर्यावरण संरक्षण के मॉडल ग्राम पिपलांत्री


शिक्षा एवं पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर ने गुरुवार को राजसमंद में पर्यावरण संरक्षण के मॉडल ग्राम पिपलांत्री में जल ग्रहण प्रशिक्षण केंद्र (विस्तार) तथा सरफेस बेरियर कार्य का लोकार्पण किया। इस दौरान शिक्षा मंत्री ने ग्राम पंचायत कार्यालय का अवलोकन कर व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया।

दिलावर ने कहा कि भारत में प्रति व्यक्ति पेड़ों का औसत अत्यंत कम है, जो चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को लेकर समाज में अभी भी पर्याप्त जागरूकता का अभाव है। यदि यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में पानी की भारी कमी का संकट उत्पन्न हो सकता है।

सरफेस बेरियर कार्य का लोकार्पण

उन्होंने बताया कि आज जितना पानी रिचार्ज हो रहा है, उससे कई गुना अधिक पानी का दोहन किया जा रहा है, जो अत्यंत खतरनाक संकेत है।

दिलावर कहा कि यदि हमें खुद को और मानवता को ज़िंदा रखना है तो पानी को बचाना ही होगा। पानी का अंधाधुंध उपयोग अब बंद करना होगा। उन्होंने स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति सजगता पर जोर देते हुए कहा कि पॉलिथीन का उपयोग कम कर पर्यावरण को सुरक्षित रखना है।

पिपलांत्री मॉडल की सराहना

सराहना करते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि यह मॉडल पूरे देश में पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणादायक उदाहरण बन चुका है। यहां हर बेटी के जन्म पर 111 पौधे लगाने की परंपरा ने न केवल गांव को हराभरा बनाया है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच भी विकसित की है।

पिपलांत्री में जल ग्रहण प्रशिक्षण केंद्र

पेड़ों की सुरक्षा, उनके नियमित पोषण और संरक्षित क्षेत्र बनाने जैसे प्रयासों ने पिपलांत्री को एक सतत विकास का आदर्श स्थल बना दिया है। मंत्री ने कहा कि आज जब देश पर्यावरणीय चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे समय में पिपलांत्री का मॉडल वैश्विक स्तर पर भी अनुसरण करने योग्य है।

पर्यावरण के प्रति जागरूकता

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पिपलांत्री में पौधरोपण के साथ-साथ जल संरक्षण, वेस्ट मैनेजमेंट और सामुदायिक सहभागिता जैसी व्यवस्थाएं इसे विशेष पहचान देती हैं। गांव के लोगों में पर्यावरण के प्रति जो जागरूकता और समर्पण दिखाई देता है, वह पूरे राजस्थान के लिए गौरव की बात है।

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