दुनिया के सबसे बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp पर एक गंभीर सुरक्षा चूक सामने आई है। एक खामी के कारण लगभग हर व्हाट्सऐप यूजर का फोन नंबर ऑनलाइन एक्सपोज़ पाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह खामी करीब 3.5 बिलियन अकाउंट्स को प्रभावित करती है, जो व्हाट्सऐप के लगभग पूरे यूज़रबेस के बराबर है।
हैरानी की बात यह है कि इसकी जिम्मेदार कोई हैकर ग्रुप नहीं, बल्कि इसकी पेरेंट कंपनी Meta की लापरवाही मानी जा रही है। कंपनी को इस कमजोरी की जानकारी साल 2017 में ही दे दी गई थी, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।
2017 में दी गई चेतावनी को Meta ने यूं ही टाल दिया

University of Vienna के शोधकर्ताओं ने 2017 में व्हाट्सऐप में एक तकनीकी खामी का पता लगाया था। ये खामी इतनी साधारण थी कि शोधकर्ताओं ने सिर्फ 30 मिनट में अमेरिका के लाखों व्हाट्सऐप नंबर हासिल कर लिए।
हालांकि डेटा को तुरंत डिलीट कर दिया गया और Meta को आगाह भी किया गया, लेकिन कंपनी ने इस पर किसी त्वरित सुरक्षा सुधार की जरूरत नहीं समझी।
हर यूजर के लिए खतरे की घंटी
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह खामी व्हाट्सऐप के उस सिस्टम से जुड़ी है जो यह पता लगाता है कि आपके फ़ोनबुक में सेव किया गया नंबर व्हाट्सऐप पर सक्रिय है या नहीं। इसी प्रक्रिया में मौजूद कमजोरी ने फोन नंबरों को एक्सपोज़ होने का मौका दिया।
यदि यही खामी किसी साइबर क्रिमिनल के हाथ लग जाती, तो यह अब तक का सबसे बड़ा मोबाइल नंबर डेटा ब्रीच साबित हो सकता था।
मीडिया में मामला खुलने के बाद Meta की सफाई
चौंकाने वाली बात यह है कि Meta को अमेरिकी यूजर्स के डेटा एक्सपोज़र की जानकारी कई महीनों पहले मिल चुकी थी। लेकिन कंपनी ने अब तक कोई सार्वजनिक चेतावनी जारी नहीं की।
जब मामला मीडिया में आया, तब Meta ने इसे अपने Bug Bounty Program का हिस्सा बताते हुए सफाई पेश की और कहा कि वे इस खामी को ठीक करने की प्रक्रिया में हैं।

