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कौन है ज्यादा ताकतवर ईरान या इज़रायल?

ईरान और इज़रायल के बीच तनाव काफी बढ़ चूका है| 13 june को इज़रायल ने ईरान के नतांज परमाणु केंद्र पर हमला किया, और उसके बाद ईरान ने जवाब में खुली जंग का ऐलान कर दिया है। इस जंग के माहौल में अब बड़ा सवाल ये है की क्या दोनों देशों के बीच वाकई जंग छिड़ सकती है? और अगर ऐसा हुआ, तो कौन पड़ेगा किस पर भारी ? कौन है ज्यादा दमदार ? चलिए जानते है किस देश के पास कितनी सैन्य क्षमता है, बात करे अगर ईरान की तो ईरान के पास लगभग 6.1 लाख एक्टिव सैनिक हैं, और इसके साथ ही 3.5 लाख रिजर्व सैनिक भी—यानि कुल मिलाकर 11 लाख का एक बड़ा सुरक्षा बल। इसके अलावा ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC में भी करीब 1.5 लाख जवान तैनात हैं, जो इसकी सैन्य ताकत को और बढ़ाते हैं। अब बात इज़रायल की करें तो उसके पास करीब 1.7 लाख एक्टिव सैनिक हैं और साथ ही 4.65 लाख रिजर्व फोर्स तैयार हैं। कुल मिलाकर इज़रायल के पास करीब 6.35 लाख का सैन्य बल है। इस data ke अकॉर्डिंग तो संख्या में ईरान का पलड़ा भारी नजर आता है। बात करे इनकी हवाई सैन्य शक्ति तो इज़रायल की एयर फोर्स के पास कुल 612 विमान हैं, जिनमें 240 फाइटर जेट्स शामिल हैं। इनमें से कई F-35 जैसे अत्याधुनिक स्टील्थ जेट्स भी हैं। इसके अलावा इज़रायल के पास 48 अटैक हेलिकॉप्टर भी हैं, जो जमीनी और हवाई दोनों तरह के लक्ष्यों पर सटीक वार करने में सक्षम हैं। सबसे बड़ी ताकत है इज़रायल का आयरन डोम डिफेंस सिस्टम, जो मिसाइलों और ड्रोन्स को हवा में ही नष्ट कर सकता है। बात करें ईरान की तो उसके पास 551 एयरक्राफ्ट हैं, जिनमें 186 फाइटर जेट्स और सिर्फ 13 अटैक हेलिकॉप्टर हैं। हालांकि, ईरान ड्रोन और रॉकेट अटैक्स पर ज्यादा निर्भर करता है, लेकिन उसके पास हाई-टेक एयर डिफेंस की उतनी क्षमता नहीं है। यानी वायु शक्ति और तकनीक के मामले में इज़रायल ईरान से कहीं आगे नजर आता है। ईरान के पास 107 नौसैनिक जहाज हैं, जिनमें 25 सबमरीन शामिल हैं। वहीं इज़रायल के पास 62 जहाज और 5 अत्याधुनिक सबमरीन हैं। बात करे ग्लोबल सपोर्ट की तो, इज़रायल को अमेरिका का पूरा समर्थन हासिल है। अमेरिका उसे हथियार और तकनीक मुहैया कराता है, जिससे उसकी सैन्य ताकत काफी मजबूत है। वहीं ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध लगे हैं, जो उसकी क्षमता को सीमित करते हैं। हालांकि वह रूस और चीन से रिश्ते बनाकर संतुलन की कोशिश कर रहा है। लेकिन ग्लोबल समर्थन में इज़रायल का पलड़ा भारी है।