लगभग 8 महीने जेल की सलाखों के बीच गुजारने वाले नरेश मीणा फिलहाल तो जेल से बाहर आ गए है .लेकिन अब उनके हर एक मूवमेट पर सबकी निगाहें टिकी हुई है .सियासी गलियारों में तो नरेश मीणा को लेकर यही चर्चा है कि अब वो अगला कदम क्या उठाने वाले है .हालांकि नरेश मीणा ने अभी खुद की तरफ से कोई बडा ऐलान नहीं किया है.जिससे कोई राजनीतिक हलचल पैदा हो .लेकिन उन्होंने इशारों –इशारों में संदेश तो दे दिया है कि अब एक बार फिर से राजनीति में वो मजबूती से उतरने वाले है . दरअसल नरेश मीणा जैसे ही सलाखों से बाहर आये तो उन्होने सबसे पहले अपना सिर जनता के सामने झुकाया.और मीडिया से बात करते हुए कहा कि समरावता गांव ने मुझे नया जीवन दिया है .और मैं वचन देता हूं कि मैं आखिरी सांस तक श्रवण कुमार बनकर गांव के हर परिवार की सेवा करुंगा नरेश मीणा ने रामायण की चौपाई “रघुकुल रीत सदा चली आई प्राण जाए पर वचन न जाये” से अपनी बात रखते हुए कहा कि सनातन मान्यताओं के अनुसार किसी का स्वागत सत्कार अस्वीकार नहीं करना चाहिए. लेकिन न्यायालय के आदेशों की पालना करनी है इस लिए में ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा. वह न्यायालय के आदेशों की सदा पालना करूंगा, समरावता की जनता से रूबरू होते हुए नरेश मीणा ने कहा कि समरावता ने मुझे अपना बेटा माना और में बेटा बनकर ही आया हूं . राजस्थान में अगला विधानसभा चुनाव 2028 में है, लेकिन क्या इस साल ही नरेश मीणा विधानसभा में पहुंच पाएंगे ? इसके बारे में क़यास लगाए जा रहे हैं. राजस्थान की राजनीति पर नज़र रखने वाले मान रहे हैं कि इस वक्त नरेश मीणा की लोकप्रियता उठान पर है, ऐसे में वो इसका फायदा उठाना चाहेंगे. लेकिन सवाल यह है कि कैसे ?दरअसल बारां जिले की अंता विधानसभा सीट से भाजपा के विधायक कंवरलाल मीणा को SDM को पिस्तौल दिखाने के मामले में सजा हो चुकी है. विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने स्टेट एडवाकेट जनरल राजेंद्र प्रसाद की रिपोर्ट के आधार पर मीणा की सदस्यता को आधिकारिक रूप से रद्द घोषित कर दिया है. इस फैसले के बाद से ही एक बार फिर प्रदेश में उपचुनाव की स्थिति बन गई है. अंता सीट को अब खाली घोषित किया गया है और जल्द ही चुनाव होने की संभावना है. अंता सीट पर कांग्रेस के नेता और पूर्व विधायक प्रमोद जैन भाया का दबदबा रहा है. जैन यहां से विधायक रहे हैं और पूरवर्ती सरकार में मंत्री भी रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ नरेश मीणा लगातार प्रमोद जैन भाया के खिलाफ करप्शन के आरोप लगाते रहे हैं. पिछले कुछ सालों में नरेश मीणा ने भाया का जम कर राजनीतिक विरोध किया है. भाया के घर के सामने प्रदर्शन किए हैं, इस मामले में तो नरेश मीणा पर मुक़दमा भी दर्ज किया गया है. राजनीति के जानकार मानते हैं कि इस सीट पर नरेश मीणा की काफी पहले से नज़र है. यहां मीणा समुदाय की अच्छी-खासी तादाद भी है. ऐसे में नरेश मीणा के लिए यह बड़ा अवसर हो सकता है.
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