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क्या करणी सेना की रैली से जाट-राजपूत के बीच बढ़ेगा टकराव ?

8 जून को नागौर में करणी सेना एक रैली प्रस्तावित है .इसे लेकर राज शेखावत लगातार राजपूत समाज के लोगों से संपर्क कर रहे है और लोगों को इस रैली में आने के आमंत्रित कर रहे है.वही नागौर में आयोजित होने वाली इस रैली से नागौर की कानून व्यवस्था बिगडने का अंदेशा भी लगाया जा रहा है.और कुछ राजपूत वर्ग के लोगों का मानना है कि इस रैली के बाद राजपूत और जाट समाज के बीच टकराव बढेगा.जिसके चलते उन्होने इस रैली पर रोक लगाने की भी मांग कर डाली है,.हनुमान बेनीवाल एक बयान से नागौर का माहौल इतना गर्म हो जाएगा .किसी ने सोचा नहीं था.जहा एक तरफ राजपूत समाज बेनीवाल के खिलाफ आर पार की लडाई लडने के लिए 8 जून को नागौर कूच करने की तैयारी कर रहा है .वही दूसरी तरफ कुछ संगठन के द्वारा इस रैली पर रोक लगाने की मांग की जा रही है.उनका मानना है कि कुछ लोग इस रैली के माध्यम से राजूपत और जाटों के बीच आपसी टकराव बढाना चाहते है.जिससे आपसी भाईचारे को बडा नुकसान हो सकता है.वही दूसरी तरफ राजपूत समाज से आने वाले समस्त वरिष्ठ प्रतिनिधियों का इस रैली का समर्थन मिल गया है और बडे स्तर पर राज शेखावत घर घर जाकर इस रैली मंे राजपूत समाज के लोगों को एक जाजम पर लाने की और हनुमान बेनीवाल को करारा जवाब देने की कोशिश में जुटे है.लेकिन देखने वाली बात तो ये है कि राजपूत समाज से जुडे कुछ लोग ही नागौर में इस रैली का विरोध करने में जुट गए है.वही बेनीवाल के समर्थक भी इस रैली को लेकर सोशल मीडिया पर विभिन्न चेतावनी भरे वीडियो शेयर कर रहे है .ऐसे में क्या नागौर में इस बार क्या बडे टकराव की स्थिति राजपूत और जाट समाज के बीच देखने को मिलेगी.क्योंकि हमेशा जाट और राजपूत समाज मिलकर कोई बडी लडाई लडते थे .लेकिन आज वही दोनों समाज एक दूसरे के खिलाफ टकराव की स्थिति में आ गए है .लेकिन सबसे बडा सवाल तो ये उठता है कि नेताओं की बयानबाजी का खामियाजा आखिर समाज और आमजन क्यों उठाए.जातिवाद के फेर में नेता ऐसे ऐसे बयान देते है जिससे आपसी भाईचारे पर सवाल आ खडा होता है.