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आखिर विजय बैंसला ने अपनी ही सरकार में आंदोलन की राह क्यों चुनी !

राजस्थान में एक बार फिर गुर्जर आंदोलन की सुगबुगाहट है. इसकी तैयारी के लिए आरक्षण संघर्ष समिति ने पीलूपुरा में 7 जून की सुबह 8 बजे महापंचायत बुलाई. महापंचायत के लिए पीलूपुरा को चुने जाने के पीछे भी एक रणनीतिक वजह है. क्योंकि यह इलाका गुर्जर आंदोलन के प्रमुख केंद्रों में रहा है. वही गुर्जर आंदोलन की आहट से ही प्रशासन और राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ गई है .कुछ आशंकाएं तो ये भी जताई जा रही है कि इस बार गुर्जर आंदोलन में 2008 वाली झलक देखने को मिल सकती है क्योंकि इस बार गुर्जर समाज ने आर या पार की लडाई लडने की ठान ली है…देखिए ये रिपोर्ट…विजय बैंसला का महापंचायत बुलाने का मुख्य उद्देश्य गुर्जर समाज के लिए आरक्षण की मांग को फिर से जोर-शोर से उठाना और सत्ता पर दबाव बनाना है। वे वर्तमान भाजपा सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रहे हैं और इसका मुख्य कारण यह है कि सरकार ने पूर्व में की गई घोषणाओं को लागू नहीं किया है। पीलूपुरा को चुने जाने की वजह यह है कि यह वह स्थल है, जहां 2008 में गुर्जर आरक्षण आंदोलन अपने चरम पर था, और इसने समाज को एकजुट करने का काम किया था। वहीं, कर्नल बैंसला की मजबूत छवि और प्रभाव था, जो आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है।विजय बैंसला ने अपने पिता कर्नल बैंसला के मार्गदर्शन में आंदोलन में भाग लिया था और अब वे उसी संघर्ष को आगे बढ़ा रहे हैं। पीलूपुरा से महापंचायत बुलाने का उद्देश्य इस क्षेत्र की सामूहिक पहचान और संघर्ष की धारा को एक बार फिर से जागृत करना है। इसके साथ ही, सोशल मीडिया और अन्य प्रचार माध्यमों के जरिए वे समाज में अपने संदेश को फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, जैसे कि घर-घर जाकर पीले चावल देना और अपील वाले वीडियो वायरल करना।उनकी नाराजगी सिर्फ मौजूदा सरकार से ही नहीं है, बल्कि यह भी है कि पिछले समझौतों को लागू नहीं किया गया और उनके द्वारा की गई कई प्रमुख मांगों को नजरअंदाज किया गया। यह आंदोलन समाज की राजनीति और भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है, और विजय बैंसला का नेतृत्व इसे आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय है।