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दिखावे की परंपरा पर सख्ती, सिंधी मुस्लिम समाज ने शुरू किया बदलाव

जब देश के कई हिस्सों में शादियों और मृत्युभोज के नाम पर खर्च की होड़ मची है, तब जालोर जिले के बागोड़ा उपखंड के खोखा गांव में सिंधी मुस्लिम समाज ने समाज सुधार की नई मिसाल कायम की है। गांव में आयोजित एक सामूहिक बैठक में समाज ने एकमत होकर फिजूलखर्च, दिखावे और परंपरा की आड़ में फैलती कुरीतियों पर नकेल कसने के लिए कठोर निर्णय लिए।सैकड़ों की उपस्थिति में तय किया गया कि शादी, सगाई, मायरा और मृत्युभोज जैसे पारिवारिक आयोजनों में अब सादगी को अपनाया जाएगा। किसी भी प्रकार की बेवजह की रस्में, जैसे बाने-बिठाई, मेहंदी, बारात में बेइंतहा गाड़ियां, वीडियोग्राफी, महंगे मायरे और तड़क-भड़क से परहेज किया जाएगा।बैठक में स्पष्ट किया गया कि यह निर्णय किसी व्यक्ति विशेष पर नहीं, बल्कि पूरे समाज की बेहतरी के लिए है। देखा गया कि लोग एक-दूसरे को देखकर खर्च बढ़ा रहे हैं, जिससे कई परिवार कर्ज में डूब जाते हैं और शादी जैसे पवित्र संस्कार बोझ बन जाते हैं।अब शादी की तारीखें परिवार खुद तय करेंगे बारात सीमित वाहनों से जाएगी, और किसी भी प्रकार का पान-मसाला, गुटखा या नशा प्रतिबंधित रहेगा। यह भी तय किया गया कि शादी समारोहों में वीडियोग्राफी बंद रहेगी और बटासा जैसी रस्में केवल घर की महिलाओं तक सीमित रहेंगी।एक अनोखा निर्णय यह भी लिया गया कि घर की महिलाओं के पास केवल सादा कीपैड मोबाइल होंगे। टच मोबाइल और सोशल मीडिया से जुड़ी आदतों पर रोक लगाने का उद्देश्य महिलाओं को डिजिटल प्रदूषण और समय की बर्बादी से बचाना है।समाज ने न केवल कुरीतियों पर रोक लगाने का संकल्प लिया, बल्कि बच्चों की शिक्षा को भी प्राथमिकता दी। यह निर्णय लिया गया कि हर बच्चा स्कूल जाएगा, और जब तक वह पढ़ता रहेगा, परिवार उसे हर संभव सहयोग देगा। इसके लिए गांव में एक विशेष शिक्षा निगरानी समिति भी गठित की जाएगी, जो बच्चों की पढ़ाई और स्कूल उपस्थिति पर नजर रखेगी।मृत्युभोज में भी दिखावे की परंपरा को पूरी तरह से खत्म करने की बात कही गई। किसी भी व्यक्ति द्वारा भोज या दावत आयोजित करना समाज के नियमों के विरुद्ध माना जाएगा। अगर कोई व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो समाज द्वारा पहले चेतावनी और फिर जुर्माना लगाया जाएगा।”यह सिर्फ एक बैठक नहीं थी, यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की नींव रखने जैसा था। अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम परंपरा में रहकर विवेक और संयम का रास्ता चुनें।”