राजस्थान सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत 3 लाख से अधिक पेंशनर्स की पेंशन अस्थायी रूप से रोक दी है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने उन लाभार्थियों को नोटिस जारी करने की तैयारी की है, जिन्होंने सालाना ₹24,000 से अधिक का बिजली बिल भरा है। विभाग ने उनकी आय की जांच करवाने के आदेश दिए हैं। जांच पूरी होने तक उनकी पेंशन जारी नहीं की जाएगी।

बिजली बिल के आधार पर जांच शुरू
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के प्रमुख सचिव आशीष मोदी ने सभी जिला कलेक्टर्स को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं कि 24 हजार रुपए से अधिक सालाना बिजली बिल भरने वाले पेंशनर्स की आय की पुनः जांच की जाए। जांच पूरी होने तक पेंशन भुगतान रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
अब संबंधित अधिकारी इन पेंशनर्स को नोटिस जारी करेंगे और उनकी आय पात्रता की गहराई से जांच की जाएगी।

आय सीमा से अधिक मिलने पर पेंशन रद्द
विभाग के अनुसार, अगर जांच में किसी पेंशन लाभार्थी की सालाना आय ₹48,000 से अधिक पाई जाती है, तो उसकी पेंशन स्थायी रूप से बंद कर दी जाएगी। वहीं, जिनकी आय ₹48,000 या इससे कम पाई जाएगी, उनकी रोकी गई पेंशन फिर से शुरू की जाएगी।
प्रदेश में वर्तमान में बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन के रूप में ₹1,000 से ₹1,500 प्रतिमाह दिए जाते हैं, जो हर वर्ष 15% बढ़ती है।
जनाधार प्राधिकरण ने दी रिपोर्ट
आयोजना विभाग के अधीन आने वाले जनाधार प्राधिकरण ने तीनों डिस्कॉम कंपनियों से बिजली बिल का डाटा जुटाया और सरकार को रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट के अनुसार, 2,05,998 परिवारों के कुल 3,02,000 पेंशनर्स ने सितंबर 2023 से अगस्त 2024 के बीच ₹24,000 से अधिक का सालाना बिजली बिल भरा है।
इसी आधार पर विभाग ने इन पेंशनर्स की आय घोषणा पर संदेह जताते हुए जांच के आदेश दिए हैं।

संदेहास्पद आय पर सख्त कदम
विभाग के आदेशों में कहा गया है कि इन 3 लाख पेंशनर्स की आय घोषणा संदिग्ध लगती है, क्योंकि ₹24,000 से अधिक बिजली बिल देने वाले की सालाना आय ₹48,000 से कम होना संभव नहीं है। इसलिए सभी जिलों में गहन जांच की जाएगी और अपात्र पाए जाने वालों की पेंशन रद्द कर दी जाएगी।
जुलाई में की गई थी ‘पेंशन गिव-अप’ की अपील
जुलाई में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने अपात्र पेंशनर्स से स्वेच्छा से पेंशन छोड़ने की अपील की थी। इस दौरान एक ‘पेंशन गिव-अप अभियान’ भी चलाया गया था। सरकार ने आश्वासन दिया था कि अभियान के दौरान पेंशन छोड़ने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

सरकार करेगी वसूली भी
विभाग ने संकेत दिया है कि यदि जांच में किसी पेंशनर की आय सीमा से अधिक पाई जाती है, तो न केवल उसकी पेंशन रद्द होगी बल्कि अब तक मिली पेंशन की राशि भी वापस वसूली जा सकती है।
निष्कर्ष
राजस्थान सरकार की यह कार्रवाई पारदर्शिता बढ़ाने और अपात्र लाभार्थियों को चिन्हित करने की दिशा में अहम कदम है। अब पेंशन केवल उन्हीं जरूरतमंदों को दी जाएगी, जो वास्तव में पात्र हैं।
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