अंता उपचुनाव में कांग्रेस की शानदार जीत को 2028 के राजनीतिक सेमीफाइनल का प्री-टेस्ट माना जा रहा था। कांग्रेस इस परीक्षा में न सिर्फ पास हुई, बल्कि बीजेपी को बड़े अंतर से हराते हुए मजबूत संदेश भी दे दिया। जयपुर और अंता दोनों जगह कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल है। इस जीत का श्रेय पूर्व मंत्री और युवा नेता अशोक चांदना को दिया जा रहा है, जिनकी भूमिका पूरे चुनाव अभियान में केंद्र में रही।
चुनाव चांदना के लिए भी प्रतिष्ठा का सवाल
अंता उपचुनाव में पार्टी ने अशोक चांदना को चुनाव प्रभारी बनाया था। यह उपचुनाव कांग्रेस के साथ-साथ चांदना की प्रतिष्ठा से भी जुड़ गया था। चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी नेता नरेश मीणा लगातार कांग्रेस पर हमलावर रहे और कई बार व्यक्तिगत टिप्पणियाँ भी कीं। नरेश ने मंचों से अशोक चांदना को “चांदनी” कहकर निशाना बनाया, जिसके बाद चांदना ने भी पूरी ताकत से मुकाबला करने का फैसला कर लिया।
चांदना ने नरेश मीणा के तीखे बयानों का जवाब शांत भाषा में दिया, लेकिन ग्राउंड पर उन्होंने युद्ध-स्तर पर मेहनत शुरू कर दी। गांव-गांव, ढाणी-ढाणी जाकर उन्होंने कांग्रेस की पकड़ मजबूत की और पूरे अभियान को गति दी।
सोशल मीडिया बयान ने बढ़ाई हलचल
चुनाव के बीच अशोक चांदना का एक सोशल मीडिया बयान भी चर्चा में रहा, जिसे नरेश मीणा के हमलों से जोड़कर देखा गया। उन्होंने लिखा था:
“याचना नहीं, अब रण होगा… युद्ध होगा और युद्ध भीषण होगा…”
यह संदेश उनके दृढ़ संकल्प का संकेत बना और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भर गया।
जीत के बाद डोटासरा का पहला फोन चांदना को
सूत्रों के अनुसार, नतीजों के बाद PCC चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने सबसे पहला फोन अशोक चांदना को किया। उन्होंने फोन पर कहा:
“हैलो टाइगर… इस जीत के हीरो आप हैं। आपकी मेहनत रंग लाई। आपकी पूरी टीम को बधाई।”
यह स्पष्ट करता है कि पार्टी नेतृत्व भी इस जीत में अशोक चांदना के योगदान को खुले तौर पर स्वीकार कर रहा है।
जहां एग्जिट पोल में कांग्रेस पिछड़ रही थी, वहां मैदान पलटा
दिलचस्प बात यह रही कि कई एग्जिट पोल और विश्लेषकों के अनुमानों में कांग्रेस कमजोर दिखाई दे रही थी। लेकिन अशोक चांदना की व्यापक जनसंपर्क, बूथ-स्तर पर मजबूत रणनीति और संगठनात्मक सक्रियता के कारण कांग्रेस ने सभी अनुमान पलट दिए।
अंता में चांदना की ‘हार नहीं मानने’ वाली टीम ने दिलाया बड़ा अंतर
नरेश मीणा की बयानबाजी ने चांदना को और ज्यादा दृढ़ बना दिया। उन्होंने इसे व्यक्तिगत लड़ाई नहीं, बल्कि कांग्रेस के सम्मान की लड़ाई मानकर मैदान संभाले रखा। परिणामस्वरूप कांग्रेस ने अंता में वह जीत हासिल की, जिसे पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ता लंबे समय तक याद रखेंगे।
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