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किरोड़ीलाल मीणा का छलका दर्द: “पार्टी ने निकाला, तब दौसा ने संभाला”

राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा एक बार फिर अपने बयान को लेकर सियासी सुर्खियों में हैं। अक्सर अपनी ही सरकार पर तीखी टिप्पणी करने वाले मीणा इस बार भावनात्मक अंदाज़ में दिखाई दिए। दौसा में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि जब उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था, तब दौसा की जनता ने उन्हें संभाला

कार्यक्रम में भावुक होते हुए मंत्री मीणा ने कहा, “जब मुझे पार्टी से निकाला गया था, मेरी नैया डूबने वाली थी। ऐसे समय में दौसा की जनता ने मुझे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में 1 लाख 46 हजार वोटों से जिताकर संसद भेजा। उस समय राष्ट्रीय दलों के उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी जीत थी, जिसे मैं कभी नहीं भूल सकता।”

डॉ. मीणा ने आगे कहा कि हालिया उपचुनाव में दौसा की युवा टीम ने भाजपा की “इज्जत बचाई”। उन्होंने कहा, “अगर यह युवा टीम मेरे साथ नहीं होती तो उपचुनाव में जमानत जब्त हो जाती। दौसा के युवाओं का मुझ पर सबसे ज्यादा हक है।”

अपने संबोधन में मंत्री मीणा ने सरदार वल्लभभाई पटेल को देश की एकता का प्रतीक बताते हुए युवाओं से पटेल जैसा दृढ़ और निर्णायक नेता बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के समय पटेल ने 543 रियासतों को जोड़कर अखंड भारत की नींव रखी थी।

राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो किरोड़ी लाल मीणा अक्सर अपने बयानों से सरकार और संगठन के लिए असमंजस की स्थिति पैदा करते रहे हैं। कुछ समय पहले दुर्लभ जी अस्पताल प्रकरण में भी उन्होंने अपनी ही सरकार की मॉनिटरिंग पर सवाल खड़े किए थे।

गौरतलब है कि सरकार बनने के बाद उन्होंने नाराजगी जताते हुए मंत्री पद से इस्तीफा भी दे दिया था, हालांकि बाद में समझाइश के बाद उन्होंने दोबारा कार्यभार संभाला। फिलहाल वे मिलावटी खाद और बीज पर सख्त कार्रवाई कर रहे हैं, जिससे प्रदेशभर में मिलावटखोरों में हड़कंप मचा हुआ है।

अब उनका यह भावुक बयान भी राजस्थान के सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।