नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने हाल ही में UPI (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) से जुड़े नियमों में बदलाव करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत ‘पुल ट्रांजैक्शन’ फीचर को बंद किया जा सकता है। यह कदम डिजिटल धोखाधड़ी की घटनाओं को कम करने और UPI लेन-देन की सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
पुल ट्रांजैक्शन क्या है?
‘पुल ट्रांजैक्शन’ उस प्रक्रिया को कहा जाता है, जिसमें व्यापारी या सेवा प्रदाता ग्राहक से भुगतान प्राप्त करने के लिए एक अनुरोध भेजता है। ग्राहक को इस अनुरोध को स्वीकार करने के लिए अपना UPI पिन दर्ज करना होता है। यह सुविधा ऑटो-डेबिट भुगतान, जैसे मासिक सदस्यता शुल्क या बिल भुगतान में उपयोग होती है।
पुल ट्रांजैक्शन फीचर के बंद होने से प्रभाव:
सुरक्षा में वृद्धि: इस बदलाव से धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी आने की संभावना है, क्योंकि ग्राहक को प्रत्येक भुगतान के लिए स्वीकृति देनी होगी।
ऑटो-डेबिट भुगतान में परिवर्तन: जो ग्राहक नियमित रूप से ऑटो-डेबिट सुविधा का उपयोग करते हैं, उन्हें अब मैन्युअली भुगतान करना होगा, जैसे मासिक बिल या सदस्यता शुल्क।
भुगतान की प्रक्रिया में बदलाव: व्यापारी और सेवा प्रदाताओं को अपने भुगतान सिस्टम में आवश्यक समायोजन करने होंगे, जिससे लेन-देन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

