राजे ने फिर पीएम नरेन्द्र मोदी से दिल्ली में मुलाकात की
- वसुंधरा और मोदी की मुलाकात पर सियासी चर्चा
- क्या राजस्थान में होने वाला है बड़ा बदलाव
- मंत्रीमंडल विस्तार को लेकर कयास जारी

क्या राजस्थान में होने वाला है बड़ा बदलाव ?
पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने फिर पीएम नरेन्द्र मोदी से दिल्ली में मुलाकात की. राजे की प्रधानमंत्री मोदी से यह मुलाकात संसद भवन में हुई. हालांकि दोनों की बातचीत का ब्यौरा अभी तक सामने नहीं आया है. लेकिन इस मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है.
मंत्रीमंडल विस्तार को लेकर कयास जारी
आपको बता दे दो दिन बाद 15 दिसंबर को राजस्थान में बीजेपी की भजनलाल सरकार के 2 साल पूरे हो रहे हैं. आज ही सीएम भजनलाल शर्मा ने अपने दो साल के कार्यकाल को लेकर मीडिया से बातचीत की है. इस बीच राजे की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात ने सूबे का सियासी पारा गरमा दिया है.राजे ने इससे पहले जुलाई माह के अंतिम सप्ताह में भी दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात की थी. हालांकि उसके बाद राजे की बीते दिनों 25 सितंबर को राजस्थान में बांसवाड़ा में हुई रैली में मुलाकात हुई थी.
लेकिन हाल ही 11 नंवबर को हुए अंता विधानसभा उपचुनाव के बाद राजे की दिल्ली में यह पीएम नरेन्द्र मोदी से पहली मुलाकात है. अंता उपचुनाव बीजेपी हार गई थी. अंता बारां जिले की विधानसभा सीट है. यह हाड़ौती का हिस्सा है. हाड़ौती बीजेपी और राजे का गढ़ माना जाता है. अंता उपचुनाव की हार से बीजेपी चिंतित भी है. अंता सीट पहले बीजेपी के खाते में थी. लेकिन उपचुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी के हाथ से यह सीट छीन ली थी.

राजस्थान में बीते कई दिनों से भजनलाल मंत्रिमंडल विस्तार की खबरें गाहे बगाहे सामने आती रही है. बीते अक्टूबर माह के अंत में सीएम भजनलाल शर्मा ने भी अपने दिल्ली दौरे के दौरान पीएम मोदी और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत केन्द्रीय मंत्रिमंडल के कई सदस्यों से मुलाकात की थी. सीएम शर्मा के बाद अब राजे की मुलाकात के कई मायने लगाए जा रहे हैं. हालांकि बताया जा रहा है कि राजे की पीएम से यह मुलाकात एक शिष्टाचार भेंट थी. लेकिन सियासी गलियारों में जो चर्चाएं चल रही है उसको लेकर भी बात करे तो प्रदेश में कुछ ही दिनों में बडा परिवर्तन देखने को मिल सकता है ….ऐसे में सीएम भजनलाल और वसुंधरा राजे के दिल्ली दौरे प्रदेश में परिवर्तन के पूरे संकेत दे रहे है …लेकिन राजनीति के जानकार इसे राजनीतिक चश्मे से देख रहे हैं और इसके कई मायने लगा रहे हैं.
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